उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री डॉ. संजय निषाद ने निषादराज किले के अस्तित्व को बचाने के लिए हुंकार भरी है. उन्होंने किले के परिसर में कथित तौर पर बनी अवैध मस्जिद और अन्य अतिक्रमण को हटाने की जोरदार मांग की है. संजय निषाद का कहना है कि यह किला निषाद समुदाय की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है, जिसके संरक्षण के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा.
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प्रशासनिक पक्षपात का आरोप और राम मंदिर का जिक्र
संजय निषाद ने सरकार और प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा कि जब अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण हो सकता है, तो निषादराज के किले के संरक्षण में प्रशासनिक पक्षपात क्यों किया जा रहा है? उन्होंने आरोप लगाया कि किले की देखरेख और सफाई का ठेका जिस एजेंसी को दिया गया है, वह पूरी तरह विफल रही है. सुंदरीकरण के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है, जबकि अवैध कब्जे जस के तस बने हुए हैं.
आरक्षण और सम्मान की लड़ाई, 2027 का लक्ष्य
किले के मुद्दे को संजय निषाद ने समाज के आरक्षण और आत्मसम्मान से जोड़ते हुए कहा कि निषाद समुदाय एक गौरवशाली इतिहास का वंशज है. उन्होंने स्पष्ट किया कि अनुसूचित जाति (SC) आरक्षण उनका संवैधानिक अधिकार है. आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए निषाद पार्टी इस आंदोलन के जरिए अपनी पकड़ मजबूत कर रही है. नेशनल हाईवे पर हुए हालिया धरने और चक्का जाम को उन्होंने इसी संघर्ष का एक हिस्सा बताया.
सांस्कृतिक रक्षा या राजनीति?
मंत्री ने अधिकारियों से मांग की है कि किले के सुंदरीकरण के लिए तत्काल कड़ी कार्रवाई की जाए और सभी अवैध ढांचों को ध्वस्त किया जाए. उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी मांगों को विशुद्ध राजनीति से अलग हटकर देखा जाना चाहिए, क्योंकि यह एक समाज की अस्मिता का सवाल है. निषाद पार्टी के कार्यकर्ता इस मांग को लेकर पूरे प्रदेश में सक्रिय हैं और इसे कानून व संस्कृति की रक्षा का मिशन बता रहे हैं.
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