मथुरा के 'फरसा वाले बाबा' (चंद्रशेखर बाबा) के निधन के बाद न केवल उनके समर्थक और ब्रजवासी दुखी हैं, बल्कि उनकी गौशाला की 350 गायें भी अपने रक्षक की कमी महसूस कर रही हैं और बेहद बेचैन नजर आ रही हैं. गौशाला में मौजूद लगभग 350 गायें, जिन्हें बाबा ने तस्करी और हादसों से बचाया था, शनिवार से ही बेचैन हैं. गौशाला के सेवादारों और बाबा के बड़े भाई ने बताया कि गायें बार-बार दरवाजे की तरफ एकटक देख रही हैं, मानो वे बाबा के आने का इंतजार कर रही हों. बाबा का गायों से इतना गहरा लगाव था कि वे उनके पास जाकर उन पर हाथ फेरते थे और उन्हें अपने हाथों से खिलाते थे.
ADVERTISEMENT
गायों के लिए बाबा का समर्पण
बाबा के भाई ने भावुक होकर बताया कि कई बार गायों की सेवा के चक्कर में बाबा तीन-तीन दिनों तक खाना नहीं खाते थे. उनके लिए गायों का पेट भरना और उनकी सेवा करना अपनी भूख से बढ़कर था. गौशाला में न केवल गायें, बल्कि नीलगाय के दो छोटे बच्चे भी हैं जिन्हें बाबा बचाकर लाए थे और वे भी उनसे बहुत घुले-मिले थे. बाबा के पास एक पिकअप गाड़ी थी जिसे वे 'गौ सेवा एंबुलेंस: तेजस विमान' कहते थे. इस गाड़ी का उपयोग सड़क हादसों में घायल गायों को रेस्क्यू करने के लिए किया जाता था. यदि किसी गाय की मृत्यु हो जाती थी, तो इसी गाड़ी से ले जाकर उसे ससम्मान समाधि दी जाती थी. गौशाला में घायल गायों के इलाज के लिए डॉक्टर की भी व्यवस्था रहती थी, जहाँ बाबा खुद खड़े होकर पट्टी और दवाई करवाते थे.
ADVERTISEMENT









