मथुरा के ब्रज क्षेत्र में गौ सेवा की मिसाल पेश करने वाले 'फरसा वाले बाबा' के निधन से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है. बाबा का गायों के प्रति प्रेम ऐसा था कि उनके जाने से न केवल अनुयायी, बल्कि आश्रम की गौमाताएं भी स्तब्ध और भावुक नजर आ रही हैं. उनके आश्रम की साढ़े तीन सौ से अधिक गायें भी अपने संरक्षक के इंतजार में बेबस नजर आ रही हैं. बाबा का गायों के साथ रिश्ता इतना गहरा था कि लोग उन्हें 'गायों के प्राण' कहते थे.
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गायों और बाबा का अनूठा प्रेम
फरसा वाले बाबा के आश्रम परिसर में वर्तमान में 350 से अधिक गायें मौजूद हैं, जिनमें से कई तस्करी से बचाकर लाई गई थीं. स्थानीय लोगों का कहना है कि बाबा जब गौशाला में आते थे, तो गायें उन्हें पहचान लेती थीं और उनके हाथ हिलाने पर अपनी खुशी जाहिर करती थीं. बाबा की निष्ठा ऐसी थी कि वे गायों की सेवा में कई बार तीन-तीन दिनों तक अन्न ग्रहण नहीं करते थे.
ब्रज में प्रसिद्ध थी 'गौ सेवा एंबुलेंस'
बाबा ने केवल आश्रम तक सेवा सीमित नहीं रखी, बल्कि पूरे ब्रज क्षेत्र के लिए एक मिसाल कायम की. उन्होंने एक खास पिकअप गाड़ी को 'गौ सेवा एंबुलेंस' का रूप दिया था. इसके जरिए सड़क पर घायल या बीमार गायों को रेस्क्यू कर आश्रम लाया जाता था और उनका इलाज किया जाता था. जो गायें दम तोड़ देती थीं, बाबा पूरी श्रद्धा के साथ उनकी समाधि बनवाते थे. आज भी वह एंबुलेंस आश्रम में खड़ी बाबा के सेवा भाव की गवाही दे रही है.
बाबा के जाने से ब्रजवासी और उनके हजारों अनुयायी गहरे दुख में हैं. हालांकि पुलिस प्राथमिक तौर पर इसे एक दुर्घटना मान रही है, लेकिन बाबा के कई अनुयायी इसे एक नियोजित घटना होने की आशंका भी जता रहे हैं. लोगों का मानना है कि बाबा जैसा चरित्रवान और दयालु व्यक्तित्व समाज के लिए एक बड़ी प्रेरणा था और उनकी कमी कभी पूरी नहीं की जा सकेगी.
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