Naseemuddin Siddiqui: उत्तर प्रदेश की राजनीति के कद्दावर नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कांग्रेस को अलविदा कह दिया है. उनके इस्तीफे के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि आखिर 8 साल तक पार्टी में रहने के बाद उन्होंने यह कदम क्यों उठाया? अब खुद सिद्दीकी ने खुलकर अपनी चुप्पी तोड़ी है और प्रियंका गांधी की टीम विशेषकर उनके सलाहकार संदीप सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं.
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'प्रियंका जी से कहा था- मैं बीमार हो जाऊंगा मुझे काम चाहिए'
नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने खुलासा किया कि कांग्रेस में काम करने का माहौल उनके जैसे जमीनी नेता के लिए अनुकूल नहीं था. उन्होंने बताया कि वह 36 सालों से धूप और झुग्गी-झोपड़ियों में रहकर काम करने के आदी रहे हैं.लेकिन कांग्रेस में उन्हें फ्रीडम नहीं मिली. सिद्दीकी ने कहा कि 'मैंने प्रियंका जी से हाथ जोड़कर कहा था कि मैं काम के बिना बीमार हो जाऊंगा, मुझे काम दीजिए. उन्होंने संदीप सिंह को इसे देखने के लिए कहा लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला.'
'क्यों का कोई जवाब नहीं होता था'
सिद्दीकी का आरोप है कि प्रियंका गांधी की टीम के रणनीतिकार संदीप सिंह उन्हें स्वतंत्र रूप से संगठन का काम नहीं करने दे रहे थे. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि 'जब पश्चिम यूपी के 14 जिलों में संविधान बचाओ संकल्प सभा अभियान शुरू किया तो संदीप सिंह का फोन आया कि इसे बंद कर दें. जब उन्होंने बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने की कोशिश की तो वहां भी उन्हें रोक दिया गया. सिद्दीकी के अनुसार टीम का हर सदस्य यही कहता था कि प्रियंका जी ने मना किया है जबकि वह स्वयं काम करने के लिए तड़प रहे थे.'
राहुल गांधी के सपोर्ट के बावजूद नहीं बनी बात
नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने स्पष्ट किया कि जब वह कांग्रेस में शामिल हुए थे. तब राहुल गांधी उनकी बातों से पूरी तरह सहमत थे. राहुल गांधी ने उन्हें जमीन पर काम शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया था. लेकिन प्रभारी और प्रदेश स्तर की टीम के बीच तालमेल की कमी ने स्थिति बिगाड़ दी.उन्होंने कहा कि 'राहुल जी से बाद में संपर्क ही नहीं हो पाया. फोन पर मैसेज का जवाब आना भी बंद हो गया.'
'मैं घर बैठे जंग नहीं लगा सकता'
इस्तीफे के फैसले पर सिद्दीकी ने कहा कि उन्होंने अचानक यह कदम नहीं उठाया. वह पिछले 5 सालों से इस घुटन को महसूस कर रहे थे. उन्होंने प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे और प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को 13 दिसंबर 2025 को ही अपनी स्थिति साफ कर दी थी. उन्होंने कहा कि 'कांग्रेस में जनसभाएं और टेबल टॉक तो होती हैं. लेकिन ग्राउंड पर काम करने का कोई स्कोप नहीं बचा था. मुझे डर था कि खाली बैठे-बैठे मुझे जंग लग जाएगी.'
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