उत्तर प्रदेश में आगामी पंचायत चुनावों को लेकर सरगर्मियां तेज हैं. एक ओर जहां शासन-प्रशासन मतदाता सूची और आरक्षण की नियमावली को अंतिम रूप देने में जुटा है, वहीं दूसरी ओर कोर्ट में लंबित मामलों ने तारीखों के ऐलान पर सस्पेंस बरकरार रखा है. इसी बीच कैबिनेट मंत्री और सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर के बयानों ने प्रदेश की सियासी तपिश और बढ़ा दी है.
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यूपी सरकार पंचायत चुनाव कराने के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन और आरक्षण व्यवस्था में सुधार जैसे तकनीकी मुद्दों पर मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है. अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही कोर्ट की हरी झंडी मिलेगी, चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया जाएगा. फिलहाल, जिला स्तर पर वोटर लिस्ट और पोलिंग बूथों का भौतिक सत्यापन युद्धस्तर पर जारी है.
आरक्षण के संवेदनशील मुद्दे पर ओम प्रकाश राजभर ने बेबाकी से अपनी राय रखी है. उन्होंने स्पष्ट किया कि जो वर्ग सामाजिक और आर्थिक रूप से ऊपर उठ चुके हैं, उन्हें अब आरक्षण के दायरे से बाहर होना चाहिए. राजभर का कहना है कि प्राथमिकता उन अति-पिछड़ों को मिलनी चाहिए जो आज भी मुख्यधारा से कटे हुए हैं. उन्होंने जोर देकर कहा, "हम आरक्षण के दुरुपयोग के खिलाफ हैं; हक उसे मिलना चाहिए जो वास्तव में इसका हकदार है."
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