समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गौतमबुद्ध नगर के दादरी से 'मिशन-2027' का शंखनाद कर दिया है. नोएडा और दादरी के इस दौरे को केवल एक रैली नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की सियासत में 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) और गुर्जर समाज को साधने की एक बड़ी रणनीतिक पहल माना जा रहा है.
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80:20 के जवाब में 5 बनाम 95 का नया फॉर्मूला
अखिलेश यादव ने अपनी रणनीति को अब एक कदम और आगे बढ़ा दिया है. भाजपा के 80 बनाम 20 के नैरेटिव को चुनौती देते हुए उन्होंने 5 और 95 की राजनीति का मंत्र दिया. उनके भाषणों का मुख्य केंद्र यह रहा कि प्रदेश के संसाधनों और फैसलों पर केवल 5% लोगों का कब्जा है, जबकि 95% आबादी (जिसमें PDA शामिल है) अपने हक से वंचित है. यह नया सामाजिक समीकरण आगामी चुनावों में निर्णायक भूमिका निभा सकता है.
गुर्जर समाज और युवाओं पर फोकस
रैली में स्थानीय गुर्जर समाज की बड़ी भागीदारी और उनकी नाराजगी साफ तौर पर उभर कर आई. अखिलेश ने युवाओं के रोजगार और शिक्षा के मुद्दों को उठाकर उन्हें अपने साथ जोड़ने की कोशिश की. उन्होंने स्पष्ट किया कि सपा का नेतृत्व अब केवल यादव केंद्रित नहीं, बल्कि पूरे 'पीडीए' परिवार को साथ लेकर चलने वाला है.
भाजपा के मजबूत गढ़ में बड़ी चुनौती
नोएडा और दादरी को भाजपा का सबसे मजबूत किला माना जाता है. यहाँ अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट और विकास के दावों के बीच अखिलेश का पहुंचना भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करता है. विशेषज्ञों का मानना है कि अखिलेश की यह सक्रियता पश्चिमी यूपी में सामाजिक ऊहापोह को बढ़ा सकती है, जिसका सीधा असर 2027 के नतीजों पर पड़ेगा.
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