अखिलेश यादव का बड़ा दांव: फूलन देवी की बहन रुक्मणी देवी बनीं सपा महिला सभा अध्यक्ष, क्या लौटेगा निषाद वोट बैंक?

Rukmani Devi Samajwadi Party: अखिलेश यादव ने फूलन देवी की बड़ी बहन रुक्मणी देवी को समाजवादी पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी दी है. जानिए क्या है मुलायम सिंह और फूलन देवी का वो पुराना किस्सा और कैसे यह फैसला 2027 के चुनाव में गेमचेंजर साबित हो सकता है.

यूपी तक

• 11:21 AM • 27 Mar 2026

follow google news

2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक बड़ा सियासी दांव चला है. उन्होंने दस्यु सुंदरी के नाम से मशहूर रहीं फूलन देवी की बड़ी बहन रुक्मणी देवी को समाजवादी पार्टी महिला सभा का अध्यक्ष नियुक्त किया है. इस फैसले ने एक बार फिर मुलायम सिंह यादव और फूलन देवी के उस ऐतिहासिक जुड़ाव की यादें ताजा कर दी हैं, जिसने उत्तर प्रदेश की राजनीति का रुख बदल दिया था. अखिलेश यादव ने रुक्मणी देवी को बड़ी जिम्मेदारी देकर पिछड़ा वर्ग, विशेषकर निषाद, केवट, मल्लाह और कश्यप समुदाय को साधने की कोशिश की है.

यह भी पढ़ें...

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भाजपा ने साध्वी निरंजन ज्योति को पिछड़ा वर्ग का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया है और संजय निषाद अपनी राजनीति को लेकर चर्चा में हैं. रुक्मणी देवी पिछले काफी समय से जालौन और बुंदेलखंड के इलाकों में समाजवादी पार्टी को मजबूत करने का काम कर रही हैं.

मुलायम सिंह और फूलन देवी: एक ऐतिहासिक किस्सा

फूलन देवी के लिए मुलायम सिंह यादव एक रक्षक की तरह सामने आए थे. 1994 में जब मुलायम सिंह की सरकार बनी, तो उन्होंने फूलन देवी पर लगे सभी मुकदमे वापस ले लिए और उन्हें जेल से रिहा करवाया. नेताजी ने न केवल उन्हें रिहा करवाया, बल्कि 1996 में मिर्जापुर से लोकसभा का टिकट भी दिया. फूलन देवी दो बार सांसद चुनी गईं. फूलन देवी ने अपनी मृत्यु से कुछ समय पहले दुबई के एक कार्यक्रम में भावुक होकर कहा था कि वे आज जो कुछ भी हैं, वह मुलायम सिंह यादव की बदौलत हैं. 

फूलन देवी का संघर्ष और 'बैंडिट क्वीन' का सफर

फूलन देवी का जीवन अत्यंत संघर्षपूर्ण रहा. 11 साल की उम्र में शादी, ससुराल में अत्याचार और फिर बीहड़ का रास्ता. उनके साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म और अपमान का बदला लेने के लिए उन्होंने 1981 में बहमई गांव में 20 से ज्यादा लोगों को गोलियों से भून दिया था, जिसने पूरे देश को हिला दिया था. 1983 में इंदिरा गांधी के प्रस्ताव पर उन्होंने कुछ शर्तों के साथ आत्मसमर्पण किया और 11 साल जेल में रहीं.

उत्तर प्रदेश की पिछड़ी आबादी में करीब 6% निषाद वोटर हैं. पूर्वी और मध्य यूपी के करीब 18 जिलों और 150 से ज्यादा सीटों पर इस समुदाय का सीधा प्रभाव है. अखिलेश यादव ने रुक्मणी देवी को आगे कर इसी बड़े वोट बैंक को 'साइकिल' के साथ जोड़ने का मास्टर स्ट्रोक खेला है.