उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध कथावाचक देवकी नंदन ठाकुर के गैस बनाम चूल्हे की रोटी वाले बयान ने प्रदेश की राजनीति में एक नया उबाल ला दिया है. एक तरफ जहां देवकी नंदन ठाकुर इसे स्वास्थ्य और परंपरा से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं विपक्ष ने इसे देश में गहराते एलपीजी (LPG) संकट और महंगाई से जोड़कर सरकार पर तीखा हमला बोला है.
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देवकी नंदन ठाकुर का बयान और विवाद की जड़
बांग्लादेशी हिंदुओं के न्याय की आवाज उठाने वाले देवकी नंदन ठाकुर ने अपने हालिया संबोधन में गैस की रोटी की तुलना में चूल्हे की रोटी को सेहतमंद और सात्विक बताया. उनके इस व्यंग्यपूर्ण अंदाज को सोशल मीडिया पर जहां एक वर्ग ने परंपरा का समर्थन माना, वहीं दूसरे वर्ग ने इसे आधुनिक समस्याओं से ध्यान भटकाने वाला बताया.
अखिलेश यादव का 'पोस्टर वार'
समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को हाथों-हाथ लिया है. उन्होंने बिना नाम लिए एक सांकेतिक पोस्टर जारी किया, जिसमें गैस सिलेंडर की आसमान छूती कीमतों और आपूर्ति के संकट पर तंज कसा गया है. विपक्ष का तर्क है कि जब जनता को सिलेंडर नहीं मिल रहा, तब 'चूल्हे की रोटी' की वकालत करना गरीब की मजबूरी का मजाक उड़ाने जैसा है.
ग्राउंड जीरो पर हाहाकार, एलपीजी का गहराता संकट
राजनीतिक बयानबाजी के बीच आम जनता की हकीकत बेहद कड़वी है. उत्तर प्रदेश समेत देश के कई हिस्सों में एलपीजी आपूर्ति की भारी किल्लत देखी जा रही है. गैस एजेंसियों के बाहर उपभोक्ताओं की लंबी लाइनें लगी हैं. गैस न मिलने के कारण ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में लोग एक बार फिर लकड़ी और उपलों पर खाना बनाने को मजबूर हो गए हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि लकड़ी का धुआं सेहत के लिए हानिकारक है, लेकिन गैस संकट ने लोगों के पास कोई विकल्प नहीं छोड़ा है.
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