यूपी Tak की इस बेहद भावुक रिपोर्ट में हरीश राणा के अंतिम सफर और उनके परिवार, विशेषकर उनकी मां के अदम्य साहस और बलिदान की कहानी दिखाई गई है. 13 साल के लंबे दर्द और संघर्ष के बाद हरीश राणा को इच्छा मृत्यु के माध्यम से शांति मिली. हरीश राणा का अंतिम संस्कार दक्षिण दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित मोक्ष धाम में किया गया. हरीश की मां ने पहले ही परिवार से कह दिया था कि कोई भी अंतिम विदाई के समय रोएगा नहीं. वे चाहती थीं कि उनका बेटा शांत मन से इस दुनिया से विदा ले और उसे शारीरिक कष्ट से मुक्ति मिले.
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हरीश के पिता अशोक राणा भी अपनी आंखों के आंसू पोंछते हुए खुद को और दूसरों को ढांढस बंधाते नजर आए. आपको बता दें कि अगस्त 2013 में चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग के छात्र हरीश अपने पीजी की चौथी मंजिल से गिर गए थे. इस हादसे में उनके सिर पर गंभीर चोट लगी, जिसने उन्हें बिस्तर पर ला दिया. परिवार ने चंडीगढ़ पीजीआई से लेकर दिल्ली एम्स और कई निजी अस्पतालों के चक्कर लगाए, पानी की तरह पैसा बहाया, लेकिन हरीश की स्थिति में सुधार नहीं हुआ. वे 13 साल तक 'विजिटेटिव स्टेट' में रहे.
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