यूपी Tak के विशेष शो "चर्चा में" में आज हरीश राणा के भाई आशीष राणा और उनकी बहन भावना के त्याग और समर्पण की कहानी बताई गई है. 13 साल के लंबे संघर्ष के बाद हरीश राणा की विदाई के समय उनके भाई-बहन का साहस और दुख पूरे देश की चर्चा का विषय बना हुआ है. सोशल मीडिया पर आशीष राणा को "कलयुग का लक्ष्मण" कहा जा रहा है. उनके समर्पण की कहानी दिल दहला देने वाली है. जब 2013 में हरीश के साथ हादसा हुआ, आशीष केवल 12वीं कक्षा के छात्र थे. बोर्ड परीक्षा की तैयारी के साथ-साथ आशीष सुबह उठकर भाई की सफाई, डायपर बदलना और फीडिंग पाइप लगाने जैसे काम खुद करते थे.
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पिता की नौकरी जाने और घर बिकने के बाद, आशीष ने ट्यूशन पढ़ाकर घर की मदद की. बाद में इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर गुरुग्राम की एक आईटी कंपनी में नौकरी की ताकि परिवार का सहारा बन सकें. आज जब उन्होंने भाई की अर्थी को कंधा दिया और मुखाग्नि दी, तो वे फूट-फूट कर रो पड़े. उनके इस दुख ने वहां मौजूद हर शख्स को भावुक कर दिया.
हरीश तीन भाई-बहनों में सबसे बड़े थे, भावना दूसरे नंबर पर और आशीष सबसे छोटे. अंतिम संस्कार के समय भावना खुद को संभालते हुए पूरे परिवार की ढाल बनी रहीं. उन्होंने अपने भाई आशीष का हाथ थामकर हरीश को मुखाग्नि दी. भावना के पति ने भी इस मुश्किल समय में दामाद नहीं, बल्कि बेटे की तरह परिवार का साथ दिया. उनकी छोटी बच्ची इस गमगीन माहौल में परिवार के चेहरे पर मुस्कान लाने का एकमात्र जरिया रही.
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