उत्तर प्रदेश की राजनीति में यह शायद पहला मौका है जब डीजल की किल्लत ने किसी बड़ी राजनीतिक रैली का पहिया जाम कर दिया है. सुभासपा अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर के निर्देश पर 30 मार्च 2026 को होने वाली प्रस्तावित महारैली को फिलहाल अगली तारीख तक के लिए टाल दिया गया है.
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ईरान-इजरायल युद्ध का असर
दुनिया भर में जारी ईरान और इजरायल के बीच सैन्य संघर्ष ने वैश्विक ईंधन आपूर्ति श्रृंखला को तोड़ दिया है. भारत में भी तेल कंपनियों को डीजल की आपूर्ति करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. इसी 'एनर्जी क्राइसिस' की छाया अब यूपी के राजनीतिक आयोजनों पर भी पड़ रही है.
जमीनी हकीकत और सरकारी दावे
इससे पहले सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया था कि राज्य में ईंधन का कोई संकट नहीं होगा, लेकिन लखीमपुर की रैली ने इन दावों की पोल खोल दी है. आयोजकों का कहना है कि रैली के लिए बड़ी संख्या में गाड़ियां जुटाई गई थीं, लेकिन डीजल उपलब्ध न होने के कारण समर्थकों का पहुंचना असंभव हो गया था. मंत्री राजभर ने कार्यक्रम की विफलता की आशंका को देखते हुए इसे स्थगित करना ही बेहतर समझा.
आयोजकों की चिंता और अगली राह
आयोजकों ने साफ तौर पर कहा कि बिना पर्याप्त डीजल के इतनी बड़ी भीड़ जुटाना मुमकिन नहीं है. अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की स्थिति कब सामान्य होती है. फिलहाल, इस घटना ने साबित कर दिया है कि वैश्विक युद्ध केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रहते, बल्कि हमारे स्थानीय सामाजिक और राजनीतिक जीवन को भी बुरी तरह प्रभावित करते हैं.
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