यूपी तक की इस 'यूपी किसका' सीरीज में देवरिया की रुद्रपुर विधानसभा सीट के राजनीतिक समीकरणों और आगामी 2027 के चुनाव की संभावनाओं का विश्लेषण किया गया है. यहां मुख्य रूप से भाजपा के जयप्रकाश निषाद और कांग्रेस (गठबंधन) के अ अखिलेश प्रताप सिंह के बीच होने वाली संभावित टक्कर की चर्चा है.
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प्रमुख दावेदार और उनका ट्रैक रिकॉर्ड
जयप्रकाश निषाद (भाजपा): वे वर्तमान में यहां से विधायक हैं और इस सीट पर चार बार जीत दर्ज कर चुके हैं. वे पिछले 10 साल से लगातार विधायक हैं और अपनी जीत के प्रति आश्वस्त हैं. उन्होंने अपने कार्यकाल में नदियों पर पुलों के निर्माण और बिजली घरों की संख्या (1 से बढ़ाकर 7) में वृद्धि को अपनी बड़ी उपलब्धि बताया है.
अखिलेश प्रताप सिंह (कांग्रेस): कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता और पूर्व विधायक हैं. वे अपने कार्यकाल में बनाई गई सड़कों के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने भाजपा पर विकास न करने और क्षेत्र में भू-माफियाओं के राज का आरोप लगाया है. उनका दावा है कि विकास के मामले में रुद्रपुर 10 साल पीछे चला गया है.
जातीय समीकरण (अनुमानित आंकड़े)
रुद्रपुर की मिक्स आबादी इस सीट के परिणाम में निर्णायक भूमिका निभाती है. अनुमानित आंकड़े इस प्रकार हैं:
- दलित: 70,000
- निषाद: 48,000
- यादव: 42,000
- क्षत्रिय (ठाकुर): 25,000
- ब्राह्मण: 21,000
- मुस्लिम: 24,000
- वैश्य: 24,000
- अन्य (राजभर, चौहान, कुशवाहा आदि): 58,000
गठबंधन और चुनावी संभावना
भाजपा का समीकरण: निषाद पार्टी के साथ गठबंधन और जयप्रकाश निषाद की अपनी पकड़ के कारण निषाद वोटों के साथ-साथ ब्राह्मण, वैश्य, सैंथवार और राजभर वोटों का एक मजबूत आधार भाजपा के पास है.
कांग्रेस-सपा गठबंधन का समीकरण: यदि अखिलेश प्रताप सिंह गठबंधन (सपा-कांग्रेस) से लड़ते हैं, तो उन्हें ठाकुर वोटों के साथ यादव, मुस्लिम और दलित वोटों का बड़ा समर्थन मिल सकता है, जिससे मुकाबला बेहद दिलचस्प और कांटे का हो जाएगा.
स्थानीय पत्रकारों की राय
स्थानीय पत्रकारों का मानना है कि जयप्रकाश निषाद एक मंझे हुए और शालीन नेता हैं, लेकिन अखिलेश प्रताप सिंह की व्यक्तिगत छवि और विकास कार्यों (सड़कें) की यादें भी जनता के बीच ताजा हैं. यदि विपक्ष एकजुट होकर लड़ता है, तो भाजपा के लिए हैट्रिक लगाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है.
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