वाराणसी के प्रतिष्ठित उदय प्रताप (UP) कॉलेज में हुई छात्र सूर्य प्रताप सिंह की हत्या के मामले में कॉलेज के प्रिंसिपल धर्मेंद्र कुमार सिंह ने पहली बार मीडिया (यूपी तक) के सामने आकर अपना पक्ष रखा है. उन्होंने कॉलेज प्रशासन पर लगे सभी आरोपों को निराधार बताते हुए घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी दी. आपको बता दें कि बीते दिनों बीएससी सेकंड ईयर के छात्र सूर्य प्रताप सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई. आरोपी बीए सेकंड ईयर का छात्र मंजीत चौहान है, जिसे गिरफ्तार किया जा चुका है.
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प्रिंसिपल ने बताया कि गोली चलने के तुरंत बाद कॉलेज की आधिकारिक गाड़ी (बोलेरो) से घायल छात्र को अस्पताल ले जाया गया. उन्होंने उन आरोपों को गलत बताया कि कॉलेज ने गाड़ी देने से मना किया था. उन्होंने कहा कि प्रक्टोरियल बोर्ड के सदस्यों और शिक्षकों ने आरोपी को दौड़ाया, जिसके कारण वह हथियार फेंककर भागने पर मजबूर हुआ, वरना वह और भी गोलियां चला सकता था.
सूर्य प्रताप के परिजनों का आरोप था कि उसे कॉलेज प्रशासन ने फोन करके बुलाया था. प्रिंसिपल ने इसे पूरी तरह नकारा और कहा कि उनके ऑफिस या किसी सदस्य ने कोई कॉल नहीं की. छात्र स्वयं मिड-टर्म बैक का फॉर्म भरने आया था.प्रिंसिपल ने कहा कि दोनों छात्रों के बीच किसी विवाद की जानकारी कॉलेज प्रशासन या प्रक्टोरियल बोर्ड को नहीं थी. दोनों छात्र कॉलेज कैंपस के बाहर रहते थे और कभी कोई लिखित शिकायत नहीं की थी.
उन्होंने छात्रों द्वारा इंस्टाग्राम और फेसबुक पर "माफिया स्टेटस" लगाने और हथियारों के प्रदर्शन पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि कॉलेज प्रशासन छात्र की निजी सोशल मीडिया गतिविधियों पर नजर नहीं रख सकता, यह माता-पिता की भी जिम्मेदारी है. 17 मार्च को एक अन्य छात्र को धमकी देने के मामले में सूर्य प्रताप का नाम आया था, जिसके संबंध में 20 मार्च की सुबह उसकी काउंसलिंग भी की गई थी, लेकिन उस मामले का मंजीत से कोई संबंध नहीं था.
प्रिंसिपल ने छात्रों से शांति बनाए रखने और अपराधी बनने के बजाय एक अच्छा नागरिक बनने की अपील की. उन्होंने कॉलेज की शैक्षणिक उपलब्धियों का हवाला देते हुए कहा कि कॉलेज रैंकिंग में नंबर वन है, लेकिन कुछ असामाजिक तत्व माहौल खराब कर रहे हैं.
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