दादरी में अखिलेश यादव की रैली के बाद मायावती के गांव वालों ने क्या बोल डाला?

दादरी में अखिलेश यादव की विशाल रैली ने बदला पश्चिमी यूपी का सियासी समीकरण. किसानों की नाराजगी और 2027 के चुनाव पर जनता की बेबाक राय. जानें ग्राउंड रिपोर्ट.

यूपी तक

• 11:11 AM • 30 Mar 2026

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दादरी की भाईचारा समानता रैली ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासी फिजा बदल दी है. मिहिर भोज कॉलेज के मैदान में उमड़ा जनसैलाब और कार्यकर्ताओं का जोश यह बताने के लिए काफी है कि समाजवादी पार्टी ने मिशन-2027 के लिए अपनी सबसे मजबूत घेराबंदी शुरू कर दी है. बादलपुर गांव और रैली स्थल पर मौजूद लोगों से हुई बातचीत में जो जमीनी हकीकत निकलकर आई, वह सत्ताधारी दल के लिए चिंता का सबब बन सकती है.

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जनता ने किया दावों का विश्लेषण

रैली में आए स्थानीय लोगों और प्रबुद्ध वर्ग का मानना है कि प्रधानमंत्री की हालिया नोएडा यात्रा और अखिलेश यादव की इस रैली में फर्क साफ है. लोगों का आरोप है कि सरकारी कार्यक्रमों में बसों और कर्मचारियों के जरिए भीड़ जुटाई गई, जबकि दादरी की इस सभा में किसान और मजदूर अपनी मर्जी से, अपने साधनों से पहुंचे हैं. सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता और सपा नेता प्रमोद यादव के अनुसार, "एक तरफ पूरा प्रशासनिक अमला लगाने के बाद भी भीड़ नहीं जुटी, और दूसरी तरफ जनता के प्यार ने पूरे दादरी को जाम कर दिया."

किसान और मजदूर, नाराजगी की मुख्य वजह?

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति हमेशा से गन्ने और मुआवजे के इर्द-गिर्द घूमती है. स्थानीय निवासी रविंद्र चौधरी और मेरठ से आए पंकज त्यागी ने बताया कि किसान आज तीन मुख्य समस्याओं से त्रस्त है:

  • गन्ना भुगतान: 6-6 महीने तक पेमेंट न मिलना और अच्छी वैरायटी के बीज का अभाव.
  • मुआवजा घोटाला: 64% अतिरिक्त मुआवजे की मांग और अथॉरिटी के अधिकारियों का 'प्राइवेट डीलर' की तरह व्यवहार करना.
  • रोजगार: युवाओं के पास काम की कमी और सरकार की पूंजीपति समर्थक नीतियां.

'जयंत फैक्टर' और सपा की नई सोशल इंजीनियरिंग

जयंत चौधरी के पाला बदलने के बाद माना जा रहा था कि सपा पश्चिमी यूपी में कमजोर होगी, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अलग दिख रही है. समर्थकों का कहना है कि पार्टी अब '36 कौम' और 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) को साथ लेकर चल रही है. जनता का मानना है कि लोकतंत्र में सबसे बड़ी ताकत 'जनता जनार्दन' है, न कि कोई खास नेता.

ईंधन संकट और महंगाई का मुद्दा

रैली में आए लोगों ने डीजल-पेट्रोल की किल्लत और गैस सिलेंडरों की बढ़ती कीमतों पर भी भारी गुस्सा जाहिर किया. उनका कहना है कि सरकार हर मोर्चे पर विफल रही है और अब जनता बदलाव के मूड में है.

दादरी की इस विशाल रैली ने यह संकेत दे दिया है कि समाजवादी पार्टी अब केवल यादव-मुस्लिम समीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि उसने किसानों और मजदूरों के बड़े वोट बैंक में सेंध लगा दी है. अखिलेश यादव का 'पॉजिटिव वे' और किसानों के प्रति उनकी सोच ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उस भ्रम को तोड़ दिया है कि यह क्षेत्र सपा के लिए कमजोर कड़ी है.