Uday Pratap Singh Story: समाजवादी पार्टी की सियासत में जब भी मूल्यों और आदर्शों की बात होती है तो एक चेहरा हमेशा अखिलेश यादव के साथ अदब से खड़ा नजर आता है. वे हैं कवि उदय प्रताप सिंह. इटावा की माटी से निकले उदय प्रताप सिंह न केवल मुलायम सिंह यादव के शिक्षक रहे हैं बल्कि आज भी वे सपा के वैचारिक स्तंभ बने हुए हैं. हाल ही में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उदय प्रताप सिंह ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव को जीत की अग्रिम शुभकामनाएं दीं. उन्होंने बेहद भावुक अंदाज में कहा 'परसों मेरी राष्ट्रीय अध्यक्ष जी से बात हो रही थी. मैंने कहा कि अगर आपकी सरकार दोबारा आ जाए तो हम जैसे बहुत से लोगों की उम्र बढ़ जाएगी.' उन्होंने सत्ता और सियासत पर कटाक्ष करते हुए अपनी मशहूर पंक्तियां भी सुनाईं और कार्यकर्ताओं को जनता के बीच शालीन व्यवहार रखने की सलाह दी.
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गुरु-शिष्य की वो अनूठी कहानी
उदय प्रताप सिंह और मुलायम सिंह यादव का रिश्ता राजनीति से कहीं ऊपर गुरु-शिष्य की परंपरा का रहा है. इस वीडियो में उनके सफर के कई दिलचस्प पहलुओं को उजागर किया गया है. उदय प्रताप सिंह इटावा में अंग्रेजी के अध्यापक थे जहां मुलायम सिंह यादव उनके छात्र थे. ग्यारहवीं कक्षा में ही जब मुलायम सिंह जेल गए थे.तब उनके गुरु को उनके 'नेताजी' बनने का अहसास हो गया था. यह भारतीय राजनीति का अद्भुत उदाहरण है कि एक गुरु अपने शिष्य का पहला कार्यकर्ता बना. 1969 में जब मुलायम सिंह ने अपना पहला चुनाव लड़ा तो उदय प्रताप सिंह उनके लिए प्रचार करने वाले अग्रिम कतार के सिपाही थे.
मुलायम सिंह ने भी अपने गुरु को भरपूर सम्मान दिया. उन्हें 1989 से 1996 और फिर 2002 से 2008 तक राज्यसभा सांसद बनाया.उदय प्रताप सिंह जितने राजनीति में सक्रिय रहे, उतने ही साहित्य के मंचों पर भी. उन्होंने नीरज जैसे दिग्गज कवियों के साथ मंच साझा किया और आज भी अपनी कविताओं के जरिए समाजवाद की अलख जगा रहे हैं. आज जब अखिलेश यादव चुनावी रण में हैं तो उदय प्रताप सिंह का यह आशीर्वाद और उनकी शायरी कार्यकर्ताओं में नया जोश भर रही है. उन्होंने स्पष्ट किया कि अकीदा और ईमानदारी ही एक सच्चे समाजवादी की असली ताकत है.
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