लोकसभा में महिला आरक्षण बिल के गिर जाने के बाद यूपी की राजनीति में भूचाल आ गया है. इस मुद्दे पर सबसे तीखा पलटवार किया है बीजेपी नेता और उत्तर प्रदेश महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने. रात के सन्नाटे में उन्होंने न केवल सड़क पर उतरकर विरोध जताया, बल्कि सीधे तौर पर अपने ही परिवार और विपक्षी दलों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया.
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आधी रात को सड़क पर संग्राम, फूंके सपा-कांग्रेस के झंडे
राजधानी लखनऊ में विधानसभा के सामने रात करीब 12 बजे अपर्णा यादव ने बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के झंडे जलाए. प्रदर्शन के दौरान अखिलेश यादव की तस्वीरों को भी आग के हवाले किया गया. अपर्णा ने बिल के गिरने को महिला अधिकारों के खिलाफ एक 'बड़ा विश्वासघात' करार दिया. उन्होंने विपक्षी दलों पर प्रहार करते हुए कहा, "इन विधर्मियों का झंडा जलेगा और ये पार्टियां भी खत्म होंगी. काली रात के बाद सूरज उगेगा और फिर से कमल खिलेगा."
परिवार बनाम विचारधारा, अखिलेश पर सीधा वार
मुलायम सिंह यादव की बहू और अखिलेश यादव की भाभी होने के नाते अपर्णा यादव का यह कदम सियासी गलियारों में काफी चर्चा बटोर रहा है. इसे महज एक राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि यादव परिवार के भीतर चल रहे वैचारिक तनाव के रूप में भी देखा जा रहा है. अपर्णा ने स्पष्ट किया कि महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर वह किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं. उन्होंने विपक्षी दलों, खासकर सपा और कांग्रेस को 'महिला विरोधी' करार दिया.
विपक्ष के लिए बड़ी चुनौती
लोकसभा में 131वां संविधान संशोधन बिल जरूरी आंकड़े (दो-तिहाई बहुमत) से 54 वोट पीछे रह जाने के कारण गिर गया. बीजेपी अब इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच आक्रामक रुख अपना रही है. अपर्णा यादव के इस प्रदर्शन ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि बीजेपी महिलाओं के हक की लड़ाई में पीछे नहीं हटने वाली है, जबकि विपक्ष ने इसमें अड़ंगा डा
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