संसद के निचले सदन में परिसीमन बिल पर चर्चा के दौरान उस समय माहौल गरमा गया जब भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और सपा प्रमुख अखिलेश यादव आमने-सामने आ गए. बहस इतनी बढ़ गई कि सपा के तमाम सांसद सदन के बीचों-बीच (वेल में) आकर नारेबाजी करने लगे. इस दौरान अखिलेश यादव ने अपने संसदीय क्षेत्र कन्नौज के एक मंदिर का जिक्र करते हुए सत्ता पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए, जिस पर निशिकांत दुबे ने भी पलटवार किया.
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बहस की शुरुआत निशिकांत दुबे के उस बयान से हुई जिसमें उन्होंने समाजवादी पार्टी के पुराने रुख और अनुसूचित जाति (SC) के सांसदों के साथ हुए व्यवहार का जिक्र किया.निशिकांत दुबे ने यशवीर सिंह प्रकरण का हवाला देते हुए सपा को घेरा. इसके जवाब में अखिलेश यादव ने भाजपा को जातिगत जनगणना के मुद्दे पर चुनौती दी.
"मेरे जाने के बाद मंदिर को गंगाजल से धुलवाया गया"
अखिलेश यादव ने सदन में अपना पक्ष रखते हुए एक बेहद भावुक और गंभीर मुद्दा उठाया.उन्होंने कहा, "माननीय सदस्य श्लोक पढ़ रहे हैं, लेकिन मैं एक बात पूछना चाहता हूं.मैं अपने संसदीय क्षेत्र कन्नौज में एक मंदिर में दर्शन करने गया था.लेकिन मेरे वहां से निकलते ही उस मंदिर को गंगाजल से धुलवाया गया. आखिर ऐसा क्यों किया गया?" अखिलेश यादव अक्सर यह आरोप लगाते रहे हैं कि उनके पिछड़े समाज से होने के कारण भाजपा के इशारे पर मंदिर का 'शुद्धिकरण' कराया गया था.
निशिकांत दुबे का पलटवार और 'माफी' वाली बात
अखिलेश के आरोपों पर निशिकांत दुबे ने भी कड़ा रुख अपनाया. उन्होंने कहा कि जिसने भी ऐसा किया है वह अपराधी है और कानून के हिसाब से उसे सजा मिलनी चाहिए. दुबे ने तंज कसते हुए कहा, "क्या आप चाहते हैं कि मैं इसके लिए कान पकड़कर माफी मांगूं? मैं कान पकड़कर भी माफी मांग लूंगा. लेकिन मैंने तो वह मंदिर नहीं धुलवाया." उन्होंने स्पष्ट किया कि अपराध किसी भी जाति या धर्म का व्यक्ति करे, वह अपराधी ही होता है.
सपा सांसदों का जोरदार प्रदर्शन
जैसे ही बहस बढ़ी, सपा के सांसद अपनी सीटों से उठकर वेल में आ गए और अखिलेश यादव के समर्थन में नारेबाजी करने लगे. स्थिति को बिगड़ते देख चेयर पर बैठे जगदंबिका पाल को हस्तक्षेप करना पड़ा. उन्होंने सांसदों को शांत कराया, जिसके बाद अखिलेश यादव ने खुद अपने सांसदों को बैठने का इशारा किया ताकि सदन की कार्यवाही आगे बढ़ सके.
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