पूर्वांचल की राजनीति में इन दिनों एक नया चेहरा चर्चा का केंद्र बना हुआ है. भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) से इस्तीफा देने के बाद अभिषेक सिंह अब पूरी तरह से राजनीतिक और सामाजिक मैदान में उतर चुके हैं. कभी बॉलीवुड की चकाचौंध और कभी प्रशासनिक गलियारों में अपनी पहचान बनाने वाले अभिषेक सिंह का लक्ष्य अब जौनपुर जनपद का विकास और सक्रिय राजनीति है. चर्चा है कि वे जौनपुर की जफराबाद विधानसभा सीट से अपनी चुनावी पारी का आगाज कर सकते हैं.
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निषाद पार्टी के सम्मेलन में मौजूदगी ने बढ़ाई हलचल
हाल ही में अभिषेक सिंह ने निषाद पार्टी के प्रमुख डॉ. संजय निषाद के साथ एक बड़े कार्यकर्ता सम्मेलन में मंच साझा किया. हालांकि, उन्होंने किसी पार्टी की औपचारिक सदस्यता लेने से फिलहाल इनकार किया है, लेकिन निषाद पार्टी के साथ उनकी बढ़ती नजदीकियों ने राजनीतिक गलियारों में कयासों का बाजार गर्म कर दिया है. उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वे समाज का हिस्सा हैं और समाज के उत्थान के लिए काम करना जारी रखेंगे.
अभिषेक सिंह का करियर काफी विविधतापूर्ण रहा है. 2011 बैच के आईएएस अधिकारी रहे अभिषेक सिंह दिल्ली में जिलाधिकारी (DM) के पद पर तैनात रहे और गुजरात चुनाव के दौरान प्रेक्षक के रूप में भी चर्चा में रहे. उनकी पत्नी दुर्गा शक्ति नागपाल भी एक बेहद चर्चित आईएएस अधिकारी हैं. प्रशासन के साथ-साथ अभिषेक ने अभिनय की दुनिया में भी हाथ आजमाया और कई म्यूजिक एलबम्स व फिल्मों का हिस्सा रहे, जिससे युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता काफी अधिक है.
जफराबाद सीट पर टिकी हैं नजरें
जौनपुर की जफराबाद सीट, जहां भाजपा और सपा का कड़ा मुकाबला रहता है, वहां अभिषेक सिंह अपनी जमीन तैयार कर रहे हैं. राम मंदिर आंदोलन से जुड़ाव और जनपद में लगातार किए जा रहे सामाजिक कार्यों के जरिए वे जनता के बीच अपनी पैठ बना रहे हैं. जानकारों का मानना है कि उनका प्रशासनिक अनुभव और दिल्ली से लेकर लखनऊ तक की पकड़ उनके राजनीतिक भविष्य के लिए एक मजबूत आधार साबित हो सकती है.
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