बाराबंकी की हाई-प्रोफाइल दरियाबाद विधानसभा सीट पर 2027 का चुनावी रण बेहद दिलचस्प होने की उम्मीद है. कभी इस क्षेत्र में 'जहां न चले कट्टा और तोप, वहां चले अरविंद सिंह गोप' जैसे नारे गूंजते थे, लेकिन पिछले दो चुनावों से इस सीट पर भाजपा के सतीश चंद्र शर्मा का अभेद्य किला बना हुआ है. सतीश शर्मा वर्तमान में योगी सरकार में मंत्री भी हैं, लेकिन हालिया लोकसभा चुनाव के नतीजों ने यहाँ समाजवादी पार्टी (सपा) के खेमे में नई जान फूंक दी है.
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दरियाबाद का सियासी सफर: राजघराने से कमल तक
दरियाबाद सीट का राजनीतिक इतिहास काफी प्रभावशाली रहा है. लंबे समय तक यह सीट राजघराने के राजीव कुमार सिंह के दबदबे में रही, लेकिन परिसीमन के बाद समीकरण पूरी तरह बदल गए. साल 2017 और 2022 में भाजपा के सतीश चंद्र शर्मा ने लगातार जीत दर्ज कर अपना वर्चस्व स्थापित किया. 2022 के चुनाव में सपा ने अपने दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री अरविंद सिंह गोप को मैदान में उतारकर कड़ी चुनौती दी थी, लेकिन जीत का सेहरा फिर भी भाजपा के सिर ही बंधा.
विकास बनाम बदलाव की लड़ाई
भाजपा का दावा: मंत्री सतीश शर्मा को भरोसा है कि प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी की 'सबका साथ-सबका विकास' की नीति फिर से कमल खिलाएगी. मुफ्त राशन, किसान सम्मान निधि और पीएम आवास जैसी योजनाओं को वे अपनी जीत का सबसे बड़ा आधार मानते हैं.
सपा की तैयारी: समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष का कहना है कि 2022 की कमियों को दूर कर बूथ स्तर पर मजबूती से काम किया जा रहा है. सपा को उम्मीद है कि जनता इस बार सत्ता परिवर्तन के मूड में है.
जातीय समीकरण: दरियाबाद की 'चाबी'
दरियाबाद में हार-जीत का फैसला मुख्य रूप से 'दलित-मुस्लिम-ब्राह्मण' त्रिकोण करता है. यहाँ के निर्णायक मतदाता इस प्रकार हैं:
- दलित (पासी): लगभग 82,000 (सबसे निर्णायक)
- मुस्लिम: लगभग 70,000
- ब्राह्मण: लगभग 54,000
- कुर्मी: लगभग 41,000
- अन्य: यादव, लोधी और क्षत्रिय मतदाता भी किंगमेकर की भूमिका निभाते हैं.
लोकसभा चुनाव के नतीजों ने बढ़ाई भाजपा की टेंशन
दरियाबाद विधानसभा क्षेत्र फैजाबाद लोकसभा के अंतर्गत आता है. पिछले लोकसभा चुनाव में सपा के अवधेश पासी को इस विधानसभा क्षेत्र में मिली करीब 10,000 वोटों की बढ़त ने भाजपा के लिए खतरे की घंटी बजा दी है. जानकारों का मानना है कि पासी समुदाय के वोट बैंक में हुए इस 'शिफ्ट' ने सपा की राह आसान कर दी है.
अगर सपा 2027 में भी इसी दलित-मुस्लिम गठजोड़ को मजबूती से थामे रखती है, तो अरविंद सिंह गोप या सपा के किसी भी प्रत्याशी के लिए मुकाबला एकतरफा हो सकता है. वहीं, भाजपा के सामने अपने कोर वोट बैंक को एकजुट रखने की बड़ी चुनौती होगी. अब देखना यह होगा कि 2027 में दरियाबाद की जनता 'काम' पर मुहर लगाती है या 'जातीय समीकरण' बाजी मार ले जाते हैं.
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