UP Election 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की सुगबुगाहट अभी से तेज हो गई है. सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर द्वारा आजमगढ़ की अतरौलिया विधानसभा सीट से खुद चुनाव लड़ने और दीदारगंज से अपने बेटे को मैदान में उतारने के ऐलान ने जिले की राजनीति में हलचल मचा दी है. अतरौलिया जो पारंपरिक रूप से समाजवादी पार्टी का अभेद्य किला माना जाता है वहां की जनता अब राजभर के इस दांव पर खुलकर अपनी राय रख रही है.
ADVERTISEMENT
सपा का गढ़ और राजभर की चुनौती
अतरौलिया सीट पर दशकों से समाजवादी पार्टी का दबदबा रहा है.वर्तमान विधायक डॉ. संग्राम यादव यहां से लगातार तीन बार से जीत रहे हैं. जबकि उनके पिता और पूर्व मंत्री बलराम यादव यहां से कई बार विधायक रह चुके हैं. इस सपा के गढ़ में ओम प्रकाश राजभर की एंट्री पर स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं.
जनता की राय: 'जमानत जब्त होगी'
अतरौलिया की जनता राजभर के इस फैसले पर तंज कसती नजर आ रही है. एक स्थानीय निवासी ने कहा, "राजभर जी जहूराबाद से विधायक थे, जब वहां की जनता ने उन्हें नकारना शुरू किया तो वो अतरौलिया भाग आए. लेकिन यहां उनकी दाल गलने वाली नहीं है." वहीं, एक अन्य व्यक्ति ने चुटकी लेते हुए कहा कि 2027 में भी यहां 'संग्राम भैया' ही लड्डू खाएंगे और राजभर की जमानत जब्त हो जाएगी.
सहयोगी दलों में रार: निषाद पार्टी की नाराजगी
ओम प्रकाश राजभर के इस ऐलान से केवल विपक्षी ही नहीं बल्कि बीजेपी के सहयोगी दल भी हैरान हैं. अतरौलिया सीट पिछले चुनाव में एनडीए गठबंधन के तहत निषाद पार्टी के खाते में थी. स्थानीय निषाद समाज के लोगों का कहना है कि राजभर ने बिना संजय निषाद से चर्चा किए मनमाना फैसला लिया है. लोगों ने सवाल उठाया कि जब यह सीट निषाद पार्टी के कोटे की है, तो सुभासपा अध्यक्ष यहाँ से दावेदारी कैसे कर सकते हैं?
परिवर्तन बनाम परिवारवाद की बहस
चाय की दुकानों और चौराहों पर बहस तेज है. जहां एक तरफ सपा समर्थकों का कहना है कि अतरौलिया बाहरी व्यक्ति को स्वीकार नहीं करेगा. वहीं कुछ लोग 'परिवर्तन' की वकालत भी कर रहे हैं. भाजपा समर्थकों और कुछ युवाओं का तर्क है कि सीट पर वर्षों से एक ही परिवार का कब्जा है और अब अन्य जातियों व चेहरों को भी मौका मिलना चाहिए. उनका मानना है कि इस बार 'सबका साथ सबका विकास' के मंत्र के साथ बीजेपी या उसका सहयोगी दल यहां बदलाव ला सकता है.
ADVERTISEMENT









