Aparna Yadav Crying: प्रतीक यादव की तेरहवीं में रोने लगीं अपर्णा यादव! Video देख हो जाएंगे इमोशनल

Aparna Yadav Crying: मुलायम सिंह यादव के बेटे प्रतीक यादव की तेरहवीं कानपुर में संपन्न हुई. भावुक पत्नी अपर्णा यादव को ढांढस बंधाने पहुंचे बीजेपी नेता सुधांशु त्रिवेदी और सांसद डिंपल यादव.

यूपी तक

• 06:33 PM • 25 May 2026

follow google news

समाजवादी पार्टी के संस्थापक स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव की तेरहवीं का कार्यक्रम कानपुर में पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ. इस अत्यंत दुखद घड़ी में दिवंगत प्रतीक यादव की पत्नी और बीजेपी नेता अपर्णा यादव अपने गहरे दुख को छुपाते हुए श्रद्धांजलि मंच पर शामिल हुईं. उन्होंने अपने पति की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी. इस दौरान प्रतीक यादव के ससुर (अपर्णा यादव के पिता) भी पूरी श्रद्धा के साथ कार्यक्रम में मौजूद रहे.

यह भी पढ़ें...

अपर्णा का सहारा बने बीजेपी नेता सुधांशु त्रिवेदी, पूरा सैफई परिवार रहा एकजुट

प्रतीक यादव को नमन करने और शोक संतप्त परिवार का हौसला बढ़ाने के लिए कई दिग्गज नेता पंडाल में पहुंचे. इस मौके पर:

  • भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सीनियर नेता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी विशेष रूप से मौजूद रहे, जो इस मुश्किल वक्त में अपर्णा यादव और उनके परिवार का सहारा बने.
  • इसके साथ ही, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष व सांसद अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव, उनकी बेटियां और परिवार के अन्य लोग भी इस दुखद आयोजन का हिस्सा बने.
  • श्रद्धांजलि देने वालों की भारी भीड़ को देखते हुए पंडाल में पुख्ता प्रबंध किए गए थे, जहां हर कोई प्रतीक यादव को अपनी यादों के जरिए नमन कर रहा था.

फिटनेस और जीव-जंतु संरक्षण के लिए जाने जाते थे प्रतीक यादव

राजनीति से दूर रहकर अपनी अलग पहचान बनाने वाले प्रतीक यादव समाज सेवा के कार्यों में हमेशा तत्पर रहते थे. जीव-जंतु संरक्षण (Animal Welfare) के प्रति उनका गहरा लगाव था. इसके साथ ही, फिटनेस के क्षेत्र में भी उन्होंने बेहतरीन काम किया था और कई आधुनिक जिम खोले थे. उनके अचानक और समय से पहले चले जाने के कारण उनके कार्यों और उनके जीवंत व्यक्तित्व की चर्चा आज हर तरफ हो रही है.

निष्कर्ष: प्रतीक यादव की याद में आयोजित इस त्रयोदशी संस्कार ने यह साबित कर दिया कि वैचारिक और राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर इंसानी रिश्ते और संवेदनाएं सबसे बड़ी हैं. इस मुश्किल वक्त में सभी नेताओं और समर्थकों ने एक सुर में परिवार के साथ खड़े होने और एक-दूसरे का सहारा बनने का संकल्प लिया.