उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर बड़ा भूचाल आने वाला है. भारत निर्वाचन आयोग ने उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की खाली हो रही 10 सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा कर दी है. चुनाव आयोग के अनुसार, इन सीटों के लिए 29 सितंबर को अधिसूचना जारी होगी, जबकि 6 अक्टूबर तक नामांकन की प्रक्रिया चलेगी. इसके बाद 16 अक्टूबर को मतदान और उसी दिन शाम को मतगणना कराई जाएगी.
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2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले हो रहा यह राज्यसभा चुनाव राज्य के भावी राजनीतिक समीकरणों को आकार देने में बेहद अहम भूमिका निभाने वाला है.
सपा की 2 सीटों पर जीत तय
विधानसभा में मौजूदा संख्या बल के हिसाब से समाजवादी पार्टी (सपा) को 2 राज्यसभा सीटें मिलने का रास्ता साफ दिख रहा है. सपा के वरिष्ठ नेता व राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, लेकिन पूरी संभावना जताई जा रही है कि पार्टी उन्हें दोबारा उच्च सदन (राज्यसभा) भेजेगी. सपा की नजर अपनी दूसरी सीट के लिए नए और मजबूत समीकरण साधने पर भी टिकी हुई है.
भाजपा का 8 सीटों पर दबदबा, कई बड़े नामों के पत्ते कटने के आसार
भाजपा के पास वर्तमान में इन 10 में से 8 सीटें हैं. खाली हो रही इन सीटों में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, पूर्व डीजीपी बृजलाल, अरुण सिंह, नीरज शेखर, बी.एल. वर्मा, सीमा द्विवेदी, और डॉ. दिनेश शर्मा जैसे दिग्गज नेताओं का कार्यकाल शामिल है. माना जा रहा है कि बीजेपी 2027 के विधानसभा चुनाव और क्षेत्रीय-जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए इस बार कई नए चेहरे और नए उम्मीदवारों को मौका दे सकती है.
मायावती की BSP को बड़ा झटका: उच्च सदन से शून्य होगा प्रतिनिधित्व
इस चुनाव का सबसे बड़ा असर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) पर पड़ने वाला है. बसपा के एकमात्र राज्यसभा सांसद रामजी गौतम का कार्यकाल समाप्त हो रहा है. उत्तर प्रदेश विधानसभा में पर्याप्त विधायकों की संख्या न होने के कारण बसपा इस बार अपना उम्मीदवार खड़ा करने या जिताने की स्थिति में नहीं है. इस वजह से संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) में बसपा का प्रतिनिधित्व पूरी तरह समाप्त हो जाएगा.
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