लखीमपुर सदर विधानसभा: 2027 के रण में किसका पलड़ा भारी, जानिए क्या कहता है राजनीतिक समीकरण?

यूपी तक

• 05:58 PM • 18 Sep 2026

लखीमपुर सदर सीट पर 2027 के चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज है. कुर्मी और मुस्लिम वोटरों के वर्चस्व के बीच सपा और भाजपा में कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है.

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लखीमपुर सदर सीट की राजनीति में इस बार समीकरण दिलचस्प मोड़ ले रहे हैं. लंबे समय तक यादव और कुर्मी मतदाताओं के मजबूत समीकरण के बल पर यह सीट समाजवादी पार्टी का गढ़ रही. हालांकि, 2012 के बाद भारतीय जनता पार्टी ने यहां अपनी पकड़ मजबूत की, जिसके परिणामस्वरूप 2017 और 2022 के चुनावों में भाजपा उम्मीदवार योगेश वर्मा ने जीत दर्ज की. 

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राजनीतिक और सामाजिक समीकरण

कुर्मी फैक्टर का वर्चस्व: लखीमपुर सदर सीट पर कुर्मी समाज का सीधा प्रभाव है. यही कारण है कि इस बार दोनों ही प्रमुख दल इस समुदाय के किसी मजबूत चेहरे पर दाव लगाने की तैयारी में हैं.   

सपा का समीकरण: समाजवादी पार्टी के लिए हमेशा से मुस्लिम और कुर्मी वोटरों का गठजोड़ फायदेमंद साबित हुआ है. पिछले लोकसभा चुनाव के नतीजों से सपा कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ा है और वे मजबूती से मैदान में डटे हैं. 

भाजपा की ताकत: भारतीय जनता पार्टी गैर-यादव और मुस्लिम वोटों के इतर अपनी पकड़ मजबूत रख रही है. साथ ही, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रशासनिक योजनाओं के धरातलीय क्रियान्वयन को भाजपा अपनी मुख्य बढ़त मान रही है. 

2027 का चुनावी परिदृश्य

स्थानीय पत्रकारों का मानना है कि अगर समाजवादी पार्टी इस बार किसी प्रभावशाली कुर्मी उम्मीदवार को चुनावी मैदान में उतारती है, तो मुकाबला बेहद कड़ा और दिलचस्प हो जाएगा. कुर्मी बाहुल्य होने के कारण यह तय माना जा रहा है कि गठबंधनों और उम्मीदवार के चयन पर ही इस सीट की जीत-हार निर्भर करेगी.

एक तरफ जहां भाजपा अपनी विकास नीतियों और उम्मीदवार की लोकप्रियता के दम पर बढ़त बनाए रखने की कोशिश में है, वहीं सपा अपने परंपरागत जनाधार और कार्यकर्ताओं के दम पर वापसी का दावा कर रही है. कुल मिलाकर, लखीमपुर सदर विधानसभा चुनाव 2027 में दोनों दलों के बीच सघन और कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा.