उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों की सरगर्मियां अभी से तेज होने लगी हैं. इस बीच राज्य की सबसे हाई-प्रोफाइल सीटों में शामिल इटावा की जसवंत नगर विधानसभा एक बार फिर सियासत के केंद्र में है. समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय महासचिव और जसवंत नगर से लगातार छह बार विधायक रहे शिवपाल सिंह यादव के अगले कदम को लेकर राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हो गई हैं.
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सपा परिवार का गढ़ और शिवपाल की राह
जसवंत नगर सीट को मुलायम सिंह यादव और सपा परिवार का अभेद्य किला माना जाता है. शिवपाल यादव ने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में प्रसपा के गठन से लेकर सपा में अपनी मजबूत वापसी तक कई उतार-चढ़ाव देखे हैं. 1996 से लगातार इस सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे शिवपाल के बारे में चर्चा है कि क्या वह 2027 में फिर मैदान में उतरेंगे या अपनी जगह परिवार के किसी सदस्य विशेषकर अपनी बहू को चुनावी राजनीति में आगे बढ़ाएंगे?
भाजपा की पैनी नजर और गैर-यादव दांव
दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए यह सीट हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है, क्योंकि पार्टी आज तक यहां खाता नहीं खोल सकी है. इस बार भाजपा जसवंत नगर में नया इतिहास रचने की तैयारी कर रही है. सामाजिक और जातीय समीकरणों को देखें तो क्षेत्र में यादव और शाक्य समुदाय का वर्चस्व है. इसी के मद्देनजर भाजपा गैर-यादव वोट बैंक को साधने की रणनीति पर काम कर रही है.
संभावित उम्मीदवारों की रेस
भाजपा की ओर से सशक्त प्रत्याशी उतारने की कवायद चल रही है, जिसमें विवेक शाक्य, मुकेश यादव, अजय यादव और शरद तिवारी के नामों पर मंथन की खबरें हैं. हालांकि, अभी तक किसी भी दल की तरफ से आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है.
2027 का सियासी समीकरण
जसवंत नगर की जंग पूरी तरह सामाजिक व जातीय लामबंदी और शिवपाल यादव की स्थानीय पकड़ के बीच केंद्रित नजर आ रही है. अब देखना यह होगा कि 2027 में शिवपाल यादव खुद अपनी सीट का बचाव करते हैं या कोई नया चेहरा सपा के इस किले की कमान संभालता है.
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