2027 से पहले यूपी में नए सियासी समीकरण, संजय निषाद की गतिविधियों से बीजेपी खेमे में हलचल?

यूपी तक

• 05:26 PM • 18 Sep 2026

निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद की सपा नेता माता प्रसाद पांडेय से मुलाकात और आशीष पटेल के 'दर्द की दवा' वाले बयान के बाद यूपी की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा तेज हो गई है.

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उत्तर प्रदेश की राजनीति में निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद पिछले कुछ समय से लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं. गोंडा के चर्चित विनोद साहनी हत्याकांड से लेकर लखनऊ के केजीएमयू (KGMU) में दिए गए धरने तक, संजय निषाद अपनी ही सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोलते नजर आ रहे हैं. इस बीच समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता व नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय से उनकी मुलाकात ने सूबे के सियासी पारे को और चढ़ा दिया है.

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माता प्रसाद पांडेय से मुलाकात और आशीष पटेल का तीखा तंज

संजय निषाद और सपा के नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय की मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म है. इस मुलाकात पर अपना रुख साफ करते हुए अपना दल (एस) के कार्यकारी अध्यक्ष और यूपी सरकार में मंत्री आशीष पटेल ने बड़ा बयान दिया है. आशीष पटेल ने चुटकी लेते हुए कहा कि 'संजय निषाद अपने दर्द की दवा ढूंढ रहे हैं, जबकि उन्हें वास्तव में कोई दर्द ही नहीं है. निषाद जी का दर्द उनकी अपनी समझ में छुपा है और वे खुद अपनी नई राह तलाश रहे हैं.'

अपराध के मुद्दों पर अपनी ही सरकार से टकराव

गोंडा में हुए विनोद साहनी हत्याकांड के बाद से इलाके की राजनीति बेहद गर्म हो गई है. तमाम राजनीतिक दल पीड़ित परिवार से मुलाकात कर न्याय का भरोसा दे रहे हैं. वहीं, संजय निषाद का पुलिस प्रशासन के खिलाफ लगातार विरोध-प्रदर्शन और केजीएमयू में धरना देना यह दर्शाता है कि वे अपने राजनीतिक व सामाजिक अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं. उनके इस रुख से बीजेपी और एनडीए (NDA) के साथ उनके रिश्तों को लेकर भी लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं.

राजभर से तल्खी और आगामी चुनावों की रणनीति

केवल बीजेपी ही नहीं, बल्कि एनडीए के सहयोगी दल सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर के साथ भी संजय निषाद के मतभेद और तीखी बयानबाजी किसी से छिपी नहीं है. पिछले चुनावी परिणामों के बाद से दोनों नेताओं के बीच आई कड़वाहट का असर निषाद पार्टी की राजनीति पर साफ देखा जा सकता है.

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या संजय निषाद अपनी मौजूदा राजनीतिक मजबूरियों से बाहर निकलने का रास्ता खोज रहे हैं या 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले किसी नए राजनीतिक समीकरण और गठबंधन की बिसात बिछा रहे हैं. बहरहाल, आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए उनकी यह नई रणनीति यूपी की राजनीति में काफी अहम मानी जा रही है.