BSP का दामन छोड़ सपा में शामिल होने वाले मयंक द्विवेदी चुनाव लड़ने पर क्या बोले?

यूपी तक

• 07:42 PM • 19 Sep 2026

मयंक द्विवेदी ने बीएसपी छोड़कर समाजवादी पार्टी जॉइन की है। बुंदेलखंड में शिक्षा और स्वास्थ्य सुधार के लिए प्रयास होंगे। 2027 के चुनाव में बदलाव की उम्मीद है।

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उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है. बुंदेलखंड की राजनीति में बड़ा उलटफेर करते हुए बांदा से 2024 के बसपा (BSP) लोकसभा प्रत्याशी और पूर्व मंत्री पुरुषोत्तम द्विवेदी के बेटे मयंक द्विवेदी ने समाजवादी पार्टी (सपा) का दामन थाम लिया है. सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी और निर्देशों के बाद पार्टी में शामिल हुए मयंक द्विवेदी ने साफ कहा है कि इस बार बुंदेलखंड की जनता बीजेपी के 10 साल के शासन से त्रस्त हो चुकी है. मयंक द्विवेदी ने PDA की नई परिभाषा देते हुए दावा किया कि "P का मतलब पंडित भी है और पीड़ित भी", और जो भी पीड़ित है, वह अखिलेश यादव के साथ खड़ा है.

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'P का मतलब पंडित और पीड़ित' - PDA पर क्या बोले मयंक?

अखिलेश यादव के 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के नारे में ब्राह्मणों (पंडितों) के जुड़ाव को लेकर पूछे गए सवाल पर मयंक द्विवेदी ने कहा ''अखिलेश यादव जी का स्पष्ट मानना है कि 'P माने पंडित और P माने पीड़ित'' पिछले 10 सालों की बीजेपी सरकार में हर वर्ग परेशान है. बांदा और चित्रकूट जैसे इलाकों में बड़ा ब्राह्मण वोट बैंक है जो अब पीड़ित होकर विकल्प के तौर पर अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी के साथ पूरी तरह जुड़ रहा है.

2027 में किस सीट से लड़ेंगे चुनाव?

2027 के विधानसभा चुनाव लड़ने के सवाल पर मयंक द्विवेदी ने स्थिति साफ की. फिलहाल किसी भी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ना तय नहीं हुआ है. राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का निर्देश मिला था कि पार्टी में आकर काम करें. पार्टी को जहां भी उनकी जरूरत लगेगी, वे उस जिम्मेदारी को निभाएंगे. प्राथमिकता 2027 में अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाना है.

बुंदेलखंड के विकास पर बीजेपी सरकार को घेरा

बुंदेलखंड की बदहाली और विकास के मुद्दे पर मयंक द्विवेदी ने सरकार पर जमकर निशाना साधा.

रेवेन्यू की उपेक्षा: बुंदेलखंड खनन से सरकार को भारी रेवेन्यू देता है, लेकिन उतना पैसा वापस यहां के विकास में नहीं लगाया जाता.

विकास ठप: 10 सालों से बीजेपी की सरकार होने के बावजूद बुंदेलखंड में अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था नहीं बन पाई. सड़कें और काम आज भी अधूरे पड़े हैं.

सिर्फ धर्म की राजनीति: क्षेत्र के जनप्रतिनिधि धरातल पर काम करने के बजाय सिर्फ धर्म और भगवान के नाम पर राजनीति कर रहे हैं जिससे किसान और आम जनता परेशान है.

AI और डिजिटल वॉर के लिए तैयार है युवा टीम

आगामी चुनावों में AI और सोशल मीडिया के जरिए होने वाले राजनीतिक हमलों पर मयंक द्विवेदी ने कहा कि उनके साथ युवाओं की पूरी मजबूत टीम है. वे AI और सोशल मीडिया के हर चैलेंज से लड़ेंगे और अपनी बात को पूरी ताकत से जनता तक पहुंचाएंगे.

जानिए मयंक द्विवेदी का राजनीतिक बैकग्राउंड

मयंक द्विवेदी बांदा-चित्रकूट की राजनीति में प्रभाव रखने वाले परिवार से आते हैं. उनके पिता पुरुषोत्तम द्विवेदी 2006 में बसपा में शामिल हुए थे और 2007 से 2012 के दौरान बसपा सरकार में विधायक व कद्दावर मंत्री रहे. मयंक द्विवेदी की पत्नी 2015 में जिला पंचायत सदस्य रहीं, जबकि मयंक द्विवेदी खुद 2021 से मौजूदा जिला पंचायत सदस्य हैं. 2024 के लोकसभा चुनाव में मयंक द्विवेदी बांदा सीट से बसपा के प्रत्याशी रहे थे जिसके बाद अब उन्होंने अखिलेश यादव की नीति से प्रभावित होकर सपा का रुख किया है.