सपा के साथ गठबंधन करेंगी पल्लवी पटेल? यूपी में 2027 के चुनाव से पहले पीडिए होगा और मजबूत

यूपी तक

• 01:59 PM • 19 Sep 2026

UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर से हलचल तेज हो गई है. खबर है कि अपना दल (कमेरावादी) की कार्यकारी अध्यक्ष और सिराथू से सपा विधायक पल्लवी पटेल की समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव से करीब डेढ़ महीने पहले मुलाकात हुई है.

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UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर से हलचल तेज हो गई है. खबर है कि अपना दल (कमेरावादी) की कार्यकारी अध्यक्ष और सिराथू से सपा विधायक पल्लवी पटेल की समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव से करीब डेढ़ महीने पहले मुलाकात हुई है. इस मुलाकात के बाद से सियासी गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गई है कि क्या पल्लवी पटेल एक बार फिर से समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन करेंगी. राज्यसभा चुनाव के दौरान पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) के मुद्दे पर दोनों नेताओं के बीच तल्खी आ गई थी, जिसके बाद दोनों के रास्ते अलग हो गए थे. लेकिन अब आगामी चुनावों को देखते हुए इस मुलाकात के कई राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं.

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राज्यसभा चुनाव से शुरू हुआ था विवाद

2024 के लोकसभा चुनाव से पहले हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान समाजवादी पार्टी को बड़ी बगावत का सामना करना पड़ा था. उस दौरान सपा के तीन प्रत्याशी जया बच्चन, आलोक रंजन और रामजीलाल सुमन मैदान में थे. पल्लवी पटेल ने तब यह कहते हुए जया बच्चन और आलोक रंजन को वोट देने से इनकार कर दिया था कि वे पीडीए का हिस्सा नहीं हैं. उन्होंने अपना वोट रामजीलाल सुमन को दिया था. चर्चा है कि इसी दौरान अखिलेश यादव और पल्लवी पटेल के बीच तीखी बहस हुई थी और यहीं से दोनों पार्टियों का रिश्ता टूट गया था.

पीडीएम का प्रयोग रहा था असफल

समाजवादी पार्टी से अलग होने के बाद पल्लवी पटेल ने 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले असदुद्दीन ओवैसी के साथ मिलकर पीडीएम (पिछड़ा, दलित और मुस्लिम) नाम का एक नया गठबंधन बनाने की कोशिश की थी. हालांकि, यह गठबंधन कुछ खास कमाल नहीं कर पाया और ओवैसी की पार्टी उत्तर प्रदेश में कोई भी चुनाव नहीं लड़ी. इस बीच, चंद्रशेखर आजाद के साथ भी बातचीत हुई, लेकिन वह भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंची. अब जब 2027 के विधानसभा चुनाव करीब आ रहे हैं, तो पल्लवी पटेल के सामने विकल्पों की कमी नजर आ रही है.

अखिलेश-पल्लवी के साथ आने की संभावना

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पल्लवी पटेल का भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के साथ जाना लगभग नामुमकिन है, क्योंकि उनकी बहन अनुप्रिया पटेल पहले से ही एनडीए का हिस्सा हैं. दोनों बहनों और उनकी पार्टियों के बीच रिश्ते अच्छे नहीं हैं. ऐसे में पल्लवी पटेल के पास सबसे मजबूत विकल्प समाजवादी पार्टी ही बचती है. अखिलेश यादव भी इन दिनों पुराने साथियों को वापस पार्टी में ला रहे हैं. ऐसे में यह संभावना जताई जा रही है कि पल्लवी पटेल और उनके उम्मीदवारों को फिर से समाजवादी पार्टी के सिंबल पर चुनाव लड़ने का मौका मिल सकता है.