आकाश ही नहीं, बहन दीपिका भी रहेंगी दूर'... मायावती ने BSP संगठन और परिवार को लेकर लिया बड़ा फैसला, अब केवल ईशान को मौका

यूपी तक

• 10:08 AM • 21 Sep 2026

बसपा प्रमुख मायावती ने भाई आनंद कुमार की बेटी दीपिका आनंद को भी पार्टी की जिम्मेदारियों से दूर रखने का फैसला किया है. अब केवल ईशान आनंद को शर्त के साथ मौका मिलेगा.

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बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने अपने भाई आनंद कुमार के परिवार और पार्टी में रिश्तेदारों की भूमिका को लेकर एक बार फिर बड़ा फैसला किया है. कुछ समय पहले तक आनंद कुमार की बेटी दीपिका आनंद को संगठन में राजनीतिक जिम्मेदारी दिए जाने की बात सामने आई थी, लेकिन अब मायावती ने उन्हें भी पार्टी की तमाम जिम्मेदारियों से पूरी तरह दूर रखने का ऐलान कर दिया है. सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट जारी कर बसपा प्रमुख ने इस कड़े फैसले के पीछे की वजह स्पष्ट की है.

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'आकाश आनंद के नक्शेकदम पर न चले कोई'- मायावती की सख्त चेतावनी

मायावती ने अपने बयान में कहा कि आकाश आनंद को पार्टी से अलग करने के बाद उनके सामने यह यक्ष प्रश्न था कि आनंद कुमार के परिवार में से किसे आगे लाया जाए और किसे नहीं. उन्होंने कहा कि काफी सोच-विचार के बाद यह निर्णय लिया गया है कि परिवार के उसी सदस्य को आगे बढ़ाया जाएगा, जो आकाश आनंद के नक्शेकदम पर न चले.

दीपिका आनंद का जिक्र करते हुए बसपा प्रमुख ने कहा कि शादी के बाद अगर उनका मामला भी आकाश आनंद की तरह निकला, तो यह पार्टी और मूवमेंट के हित में नहीं होगा. इसी आशंका को देखते हुए आकाश आनंद और उनकी बहन दीपिका आनंद को पार्टी की किसी भी छोटी या बड़ी जिम्मेदारी से पूरी तरह अलग रखा जाएगा और इस फैसले में अब कोई संशोधन नहीं होगा.

12 सितंबर के फैसले से पलटी स्थिति

मायावती का यह ताजा रुख इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि 12 सितंबर को दिए अपने बयान में उन्होंने आनंद कुमार को सांगठनिक कार्यों में मदद के लिए बेटी दीपिका की सहायता लेने की छूट दी थी. उस वक्त माना जा रहा था कि दीपिका को जल्द ही पार्टी में कोई बड़ी भूमिका सौंपी जा सकती है. हालांकि, अब नए फैसले के बाद दीपिका आनंद को लेकर स्थिति पूरी तरह बदल गई है.

ईशान आनंद को आखिरी मौका, गलती की तो परिवार का रास्ता बंद
मायावती ने साफ किया कि अब आनंद कुमार के परिवार से सिर्फ ईशान आनंद को ही सम्मानजनक जिम्मेदारी देकर आगे बढ़ाया जाएगा. हालांकि, उन्होंने सख्त हिदायत देते हुए कहा कि अगर ईशान ने भी कोई गंभीर पार्टी विरोधी काम किया, तो उन्हें भी तुरंत बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा. इसके बाद आनंद कुमार के परिवार के किसी भी सदस्य को बसपा में कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी.

बाबा साहेब और कांशीराम का दिया उदाहरण

अपने इस कठोर निर्णय को तर्कसंगत बताते हुए मायावती ने बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर और बसपा संस्थापक कांशीराम के सिद्धांतों का हवाला दिया. उन्होंने कहा कि पार्टी और आंदोलन के हित में वह अपने सगे भाई-बहनों और रिश्तेदारों के खिलाफ भी सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगी. उन्होंने डॉ. आंबेडकर द्वारा 1956 में अपने पुत्र यशवंत आंबेडकर को लिखे पत्र का उल्लेख करते हुए सार्वजनिक संपत्ति और संगठन में पारदर्शिता बनाए रखने पर जोर दिया.

23 सितंबर की बैठक पर टिकीं निगाहें

बसपा में परिवार की भूमिका को लेकर पिछले कुछ समय में कई बड़े मोड़ देखने को मिले हैं. पहले आकाश आनंद पर कार्रवाई हुई, फिर ईशान आनंद को जिम्मेदारी देकर दूर किया गया और अब दीपिका आनंद को लेकर भी स्थिति पूरी तरह साफ कर दी गई है. आगामी 23 सितंबर को होने वाली बसपा की ऑल इंडिया बैठक में पार्टी संगठन और आगे की रणनीति को लेकर पूरी तस्वीर स्पष्ट होने की उम्मीद है.