रायबरेली में अखिलेश यादव की PDA रथ यात्रा ने कांग्रेस की बढ़ा दी टेंशन, क्या अब टूट जाएगा INDIA गठबंधन?

यूपी तक

• 01:44 PM • 25 Sep 2026

Rae Bareli PDA Yatra: समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कांग्रेस के सबसे मजबूत गढ़ और राहुल गांधी के लोकसभा क्षेत्र रायबरेली से अपनी 'पीडीए यात्रा' की शुरुआत कर दी है. इस यात्रा के बाद कांग्रेस के नेताओं में सपा के प्रति भारी अशंतोष नजर आ रहा है.

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Rae Bareli PDA Yatra: समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कांग्रेस के सबसे मजबूत गढ़ और राहुल गांधी के लोकसभा क्षेत्र रायबरेली से अपनी 'पीडीए यात्रा' की शुरुआत कर दी है. बिना राहुल गांधी या कांग्रेस पार्टी के किसी भी बड़े नेता के रायबरेली में इस अभियान का आगाज होने से कांग्रेस पार्टी थोड़ी असहज नजर आ रही है. कांग्रेस के कई बड़े नेताओं ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया भी देनी शुरू कर दी है. आइए जानते हैं कि अखिलेश यादव की इस रायबरेली यात्रा के क्या राजनीतिक मायने हैं.

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बिना राहुल गांधी के रायबरेली पहुंचे अखिलेश

कांग्रेस पार्टी अमेठी और रायबरेली को अपना मजबूत किला मानती है, हालांकि इन इलाकों में समाजवादी पार्टी का वोट बैंक भी बहुत अहम है. अखिलेश यादव ने अपने पीडीए रथ की शुरुआत के लिए रायबरेली को चुना और वह बिना राहुल गांधी को साथ लिए इस अभियान पर निकल पड़े. कांग्रेस नेताओं को यह बात थोड़ी चुभ रही है कि उनके नेता के लोकसभा क्षेत्र में सपा अध्यक्ष ने बिना उन्हें शामिल किए इतना बड़ा कार्यक्रम कैसे कर दिया. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने यहां तक कह दिया कि अगर अखिलेश रायबरेली जा सकते हैं, तो हम भी इटावा और सैफई में कार्यक्रम करेंगे.

बागी विधायकों को दी कड़ी चेतावनी

अखिलेश यादव की इस रायबरेली यात्रा का एक मुख्य उद्देश्य पार्टी के उन बागी विधायकों को संदेश देना भी था, जिन्होंने हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव में सपा के खिलाफ वोट किया था. अखिलेश यादव ने सपा विधायक राहुल लोधी के घर जाकर चाय पी और अपने समर्थकों को साफ संदेश दिया कि "जो भागे हैं, वह हारेंगे." उनका सीधा निशाना रायबरेली (ऊंचाहार) के विधायक मनोज पांडे की तरफ था, जिन्होंने हाल ही में बगावत की थी.

ओबीसी वोट बैंक और सॉफ्ट हिंदुत्व

अखिलेश यादव ने अपनी इस यात्रा से बीजेपी के कोर वोटर माने जाने वाले 'लोधी' समाज को भी साधने की बड़ी कोशिश की है. राहुल लोधी के घर चाय पीने के पीछे एक बड़ा राजनीतिक कारण लोधी वोट बैंक को सपा के पाले में लाना है. इसके साथ ही अखिलेश यादव ने रायबरेली में अपना 'सॉफ्ट हिंदुत्व' का चेहरा भी दिखाया. उन्होंने बछरावां के एक मंदिर में पूजा-पाठ से अपनी यात्रा शुरू की और ब्राह्मणों को भी साधने का प्रयास किया. अखिलेश ने यह भी कहा कि बीजेपी ने वाराणसी और काशी में कई मंदिरों को तोड़ा है, जिसके जरिए उन्होंने हिंदू वोटरों को भी एक बड़ा संदेश देने की कोशिश की है.