Zaidpur Assembly Election 2027: उत्तर प्रदेश की राजनीति में बाराबंकी की जैदपुर विधानसभा एक ऐसी सीट मानी जाती है जहां समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता रहे स्वर्गीय बेनी प्रसाद वर्मा का नाम आज भी जीत की गारंटी माना जाता है. ऐसा कहा जाता है कि 2019 के उपचुनाव में बेनी बाबू ने बीमारी की हालत में चारपाई पर लेटे-लेटे सपा प्रत्याशी गौरव कुमार रावत को जीत दिला दी थी. लेकिन अब जब 'बेनी बाबू' इस दुनिया में नहीं हैं और 2027 का चुनावी बिगुल बजने वाला है तो सवाल उठता है कि क्या सपा अपनी इस मजबूत विरासत को बचा पाएगी या बीजेपी का कमल यहां दोबारा खिलेगा?
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बेनी बाबू की विरासत और सपा का वर्चस्व
2012 में परिसीमन के बाद बनी जैदपुर सीट पर सपा का दबदबा रहा है. पिछले चार चुनावों में से तीन बार (2012, 2019 उपचुनाव और 2022) सपा ने यहां परचम लहराया है. केवल 2017 की 'बीजेपी लहर' में यहां से उपेंद्र सिंह रावत भगवा फहराने में कामयाब रहे थे. स्थानीय जानकारों का मानना है कि यहाँ के कुर्मी और ओबीसी वोटर्स पर आज भी बेनी प्रसाद वर्मा के नाम का गहरा प्रभाव है.
2027 की तैयारी
वर्तमान सपा विधायक गौरव कुमार रावत का दावा है कि अखिलेश यादव के 'पीडीए' (PDA) फॉर्मूले और बीजेपी की जनविरोधी नीतियों के कारण बाराबंकी की सभी छह सीटें सपा जीतेगी. वहीं बीजेपी के नेताओं का तर्क है कि दो बार के सपा विधायक ने क्षेत्र में कोई काम नहीं किया है और जनता योगी-मोदी की जनकल्याणकारी योजनाओं के नाम पर बीजेपी को वोट देगी.
जातीय समीकरणों का उलझा जाल
जैदपुर एक सुरक्षित सीट है, जहां मुख्य मुकाबला मुस्लिम, कुर्मी और पासी (रावत) मतदाताओं के इर्द-गिर्द घूमता है.
मुस्लिम-कुर्मी-पासी: लगभग 68,000-68,000 की संख्या में.
यादव: करीब 54,000.
ब्राह्मण: करीब 35,000.
अन्य ओबीसी: करीब 35,000.
यहां हार-जीत का असली फैसला 'दलित और अन्य ओबीसी' वोटर्स के हाथ में होता है.
क्या कहता है जमीनी विश्लेषण?
स्थानीय पत्रकारों के अनुसार, यादव और मुस्लिम वोट बैंक सपा के साथ मजबूती से खड़ा रहता है. जबकि ब्राह्मण और अन्य ओबीसी वोट बीजेपी की ओर झुकाव रखते हैं. 2027 में जीत इस बात पर निर्भर करेगी कि एससी (SC) वोट किस तरफ जाता है. यदि बहुजन समाज पार्टी (BSP) मजबूत लड़ती है, तो चुनाव त्रिकोणीय हो सकता है, जिसका सीधा फायदा बीजेपी को मिल सकता है.
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