Pratappur Election 2027: प्रयागराज की प्रतापपुर विधानसभा सीट यूपी की उन चंद सीटों में से एक है जहां भाजपा का कमल आज तक नहीं खिल पाया है. यहां की राजनीति का केंद्र हैं समाजवादी पार्टी की विधायक विजमा यादव. बता दें कि विजमा केवल एक विधायक नहीं, बल्कि उस संघर्ष का चेहरा हैं जो सदन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने अपने पति जवाहर यादव के हत्यारों को सजा दिलाने के लिए डटकर खड़ी हो जाती हैं. अपनी भावुकता और जनता से सीधे जुड़ाव के लिए मशहूर विजमा यादव के गढ़ में क्या 2027 के विधानसभा चुनाव में समीकरण बदलेंगे?
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विजमा यादव की सबसे बड़ी ताकत उनका जनता से जुड़ाव है. स्थानीय लोगों का मानना है कि वह केवल वोटों के लिए नहीं, बल्कि लोगों की समस्याओं को सुनने उनकी रसोई तक पहुंच जाती हैं. अधिकारियों के बीच भी उनकी छवि एक ऐसी जुझारू नेता की है जो जनता के मुद्दों, जैसे बरना नदी की सफाई और पुलों के निर्माण के लिए लगातार संघर्ष करती हैं.
जातीय समीकरणों का जाल
प्रतापपुर की जीत-हार का फैसला यहां का 'MYD' (मुस्लिम-यादव-दलित) गठबंधन करता है. करीब 3 लाख मतदाताओं वाली इस सीट पर 85,000 यादव और 45,000 मुस्लिम वोट निर्णायक भूमिका निभाते हैं. पिछले चुनाव में भाजपा (अपना दल गठबंधन) के ब्राह्मण प्रत्याशी राकेश धर त्रिपाठी को पटेल और अन्य कोर वोटरों का पूरा साथ न मिलना भारी पड़ा.
विपक्ष की चुनौती और 2027 की राह
पूर्व मंत्री राकेश धर त्रिपाठी ने अपनी हार का ठीकरा जातीय बिखराव पर फोड़ा है. हालांकि, राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बंगाल चुनाव के नतीजों और भाजपा के बढ़ते प्रभाव का असर 2027 में यहां दिख सकता है. सवाल यह है कि क्या भाजपा का 'अपना दल' गठबंधन इस बार पटेल और ब्राह्मण मतों को एकजुट कर पाएगा, या विजमा यादव का 'पर्सनल कनेक्ट' फिर से भारी पड़ेगा.
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