Manoj Pandey News: समाजवादी पार्टी से बगावत करने वाले विधायकों की लंबी फेहरिस्त में आखिर मनोज पांडे ही क्यों बाजी मार ले गए? योगी मंत्रिमंडल विस्तार में सिर्फ उन्हें ही कैबिनेट मंत्री का दर्जा क्यों मिला? यह सवाल इस वक्त यूपी की सियासत में चर्चा का केंद्र बना हुआ है. रायबरेली के 'चाणक्य' कहे जाने वाले मनोज पांडे की बीजेपी में यह एंट्री कई समीकरणों को साधने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है.
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योगी कैबिनेट में मनोज पांडे का 'राजतिलक': अवध में बीजेपी को मिला बड़ा ब्राह्मण चेहरा, बागियों में सिर्फ पांडे ही क्यों बने मंत्री?
लखनऊ: राज्यसभा चुनाव के दौरान बीजेपी उम्मीदवार संजय सेठ को जिताने के लिए सपा के आधा दर्जन विधायकों ने बगावत की थी. लेकिन जब योगी 2.0 सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार की बारी आई, तो मुहर सिर्फ मनोज पांडे के नाम पर लगी. इस फैसले ने न केवल विपक्ष को बल्कि साथ में बगावत करने वाले अन्य विधायकों को भी चौंका दिया है.
बाकी बागियों का 'दर्द' और मनोज का 'कद'
मनोज पांडे को मंत्री बनाए जाने के बाद साथ में बगावत करने वाले राकेश प्रताप सिंह का दर्द छलक पड़ा. उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि "मंत्री बनने के बाद मैंने उन्हें फोन किया था, लेकिन न फोन उठा और न कॉल बैक आया, शायद अब उनकी व्यस्तता बढ़ गई है." दरअसल, मनोज पांडे सपा में अखिलेश यादव के इतने करीबी थे कि वे विधानसभा में मुख्य सचेतक के पद पर थे. बीजेपी जानती थी कि मनोज पांडे को तोड़ना अखिलेश यादव के लिए सबसे बड़ा मनोवैज्ञानिक और राजनीतिक झटका होगा.
बीजेपी के लिए क्यों 'खास' हैं मनोज पांडे?
मनोज पांडे को कैबिनेट में शामिल करने के पीछे बीजेपी के पास 3 बड़े कारण हैं:
अवध का ब्राह्मण चेहरा: बीजेपी को मध्य यूपी और अवध के इलाके में एक कद्दावर ब्राह्मण नेतृत्व की तलाश थी. हाल ही में यूजीसी (UGC) जैसे मुद्दों पर जब ब्राह्मणों में नाराजगी देखी गई, तब मनोज पांडे प्रखरता से 'ब्राह्मण चेतना' के साथ खड़े दिखे. बीजेपी को उम्मीद है कि वे इस नाराजगी को दूर कर सकेंगे.
रायबरेली में 'अजेय' रिकॉर्ड: मनोज पांडे 2012 से लगातार ऊंचाहार सीट जीत रहे हैं. 2017 और 2022 की 'बीजेपी सुनामी' में भी वे अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे, जो उनकी जमीनी पकड़ को साबित करता है.
सनातन का स्टैंड: स्वामी प्रसाद मौर्य द्वारा रामचरितमानस और सनातन पर दिए गए विवादित बयानों का मनोज पांडे ने सपा में रहते हुए भी विरोध किया था. बीजेपी ने उनके इस 'कड़क स्टैंड' को हाथों-हाथ लिया.
अमित शाह और सोनिया गांधी तक पहुंच
मनोज पांडे के सियासी रसूख का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह खुद दो बार उनके रायबरेली आवास पर जा चुके हैं. इतना ही नहीं, कांग्रेस की दिग्गज नेता सोनिया गांधी भी उनके घर पहुंच चुकी हैं. रायबरेली में आदित्य सिंह के पिता स्वर्गीय अखिलेश सिंह और दिनेश प्रताप सिंह जैसे दिग्गजों से उनकी पुरानी राजनीतिक अदावत रही है, लेकिन वे हर चुनौती को पार कर अपनी जगह बनाने में माहिर रहे हैं.
मुलायम का आशीर्वाद और अखिलेश से तकरार
मनोज पांडे की राजनीति मुलायम सिंह यादव की छत्रछाया में फली-फूली. नेताजी उन्हें बेहद मानते थे और अखिलेश यादव ने भी उन्हें अपने घर के सदस्यों जैसा सम्मान दिया. लेकिन 2022 चुनाव से पहले स्वामी प्रसाद मौर्य की सपा में एंट्री ने मनोज पांडे की राहें जुदा कर दीं. ऊंचाहार में स्वामी प्रसाद और मनोज पांडे की दुश्मनी दशकों पुरानी है.
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