बागी MLA मनोज पांडे, अभय सिंह और राकेश सिंह वापस जाएंगे सपा में? घर वापसी की चर्चा में कितनी हकीकत

कुमार अभिषेक

24 Feb 2026 (अपडेटेड: 24 Feb 2026, 10:21 AM)

UP News: यूपी तक के आज का यूपी शो में देखें सपा के बागी विधायकों की वापसी के कयासों का सच, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर लगे आरोपों का विश्लेषण और संतों के बीच छिड़ा सियासी संग्राम.

Photo: Manoj Pandey, Abhay Singh and Rakesh Pratap Singh

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UP News: यूपी Tak का खास शो आज का यूपी राज्य की राजनीतिक और सामाजिक हलचलों का सबसे सटीक विश्लेषण पेश करता है. आज के अंक में हम उत्तर प्रदेश की तीन बड़ी और बेहद संवेदनशील खबरों का विश्लेषण कर रहे हैं. पहली खबर राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग करने वाले बागी विधायकों की समाजवादी पार्टी में संभावित वापसी और उस पर आए तीखे बयानों से जुड़ी है. दूसरी खबर ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर लगे गंभीर आरोपों और उस पर शुरू हुई सियासी लामबंदी की है. और तीसरी खबर में हम आपको बताएंगे कि कैसे संतों का यह विवाद अब दो विचारधाराओं और राजनीतिक पार्टियों के बीच के बड़े टकराव में बदल चुका है.

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सपा के बागी विधायकों की घर वापसी की चर्चा, कयास या हकीकत?

2024 के राज्यसभा चुनाव के दौरान समाजवादी पार्टी से बगावत कर भाजपा को वोट देने वाले सात विधायकों की चर्चा एक बार फिर गरम है. सोशल मीडिया पर कयास लगाए जा रहे थे कि ये विधायक अब सपा में वापसी की राह तलाश रहे हैं. हालांकि, इन दावों पर बागी विधायकों ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है.

ऊंचाहार से विधायक मनोज पांडे, अभय सिंह और राकेश प्रताप सिंह जैसे बड़े नामों की वापसी की चर्चाओं पर खुद इन नेताओं ने विराम लगा दिया है. विधायक अभय सिंह ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि वे सपा में वापस नहीं जा रहे हैं. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि उन्हें "प्रभु श्री राम मिल गए हैं और अब माया की जरूरत नहीं है." विधायक राकेश प्रताप सिंह ने इन खबरों को भ्रामक और छवि धूमिल करने वाला बताया है. उन्होंने कहा कि उनका रोम-रोम राम भक्ति में है और वे सपा में वापसी की अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ विधिक कार्रवाई करेंगे.

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर गंभीर आरोप और राजनीतिक समर्थन

ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद इन दिनों गंभीर आरोपों और कानूनी जांच के केंद्र में हैं. उन पर लगे घृणित आरोपों के बाद यूपी की राजनीति में भी उबाल आ गया है. शंकराचार्य ने वाराणसी में मीडिया से बात करते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस की जांच पर अविश्वास जताया है. उन्होंने मांग की है कि उनके खिलाफ लगे आरोपों की जांच यूपी के बाहर की पुलिस से कराई जाए, जहां भाजपा की सरकार न हो.

इस मामले में अब सियासी लामबंदी भी तेज हो गई है. समाजवादी पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल वाराणसी पहुंचकर शंकराचार्य से मिला, वहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने भी अपना समर्थन पत्र भेजा है. विपक्ष का आरोप है कि यह शंकराचार्य को फंसाने की एक बड़ी साजिश है. दूसरी तरफ, पॉक्सो एक्ट के तहत शिकायत दर्ज कराने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी फिलहाल मीडिया की नजरों से बचते दिख रहे हैं. बताया जा रहा है कि इस मामले में जल्द ही नाबालिग बटुकों का मेडिकल परीक्षण कराया जा सकता है.

संतों का विवाद बना दो विचारधाराओं की जंग

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और जगतगुरु रामभद्राचार्य के बीच का विवाद अब केवल दो संतों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने एक बड़े राजनीतिक और वैचारिक टकराव का रूप ले लिया है. अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों का सीधा आरोप है कि यह पूरी साजिश जगतगुरु रामभद्राचार्य के इशारे पर रची जा रही है. दूसरी ओर, रामभद्राचार्य के खेमे से भी पलटवार जारी है.

अखिलेश यादव बनाम रामभद्राचार्य 

सपा चीफ अखिलेश यादव द्वारा जगतगुरु रामभद्राचार्य को लेकर दिए गए बयान ('उन्हें जेल भेज देना चाहिए था') के बाद माहौल और तनावपूर्ण हो गया है. जवाब में रामभद्राचार्य के शिष्यों ने अखिलेश यादव को 'नमाजवादी' कहकर संबोधित किया. चूंकि मामला पॉक्सो एक्ट जैसा संगीन है, इसलिए सबकी नजरें पुलिस के अगले कदम पर टिकी हैं. फिलहाल पुलिस ने इस मामले में चुप्पी साध रखी है, लेकिन गिरफ्तारी की तलवार अभी भी लटकी हुई है.