BJP की प्रचंड जीत: सुनील बंसल की ‘टीम यूपी’ ने दिखाया दम, कौन-कौन नेता-मंत्री जमा रहा मिशन बंगाल में?

UP News: उत्तर प्रदेश से राष्ट्रीय महासचिव बनाए जाने के बाद ही सुनील बंसल को पश्चिम बंगाल का जिम्मा सौंपा गया था. हालांकि, बंगाल चुनाव में जीत के लिए उन्होंने उत्तर प्रदेश की अपनी पुरानी टीम पर ही भरोसा जताया.

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कुमार अभिषेक

• 09:24 AM • 05 May 2026

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UP News: पश्चिम बंगाल में भाजपा की इस बड़ी जीत का श्रेय काफी हद तक भूपेंद्र यादव और सुनील बंसल के संगठन कौशल को जाता है. उत्तर प्रदेश से राष्ट्रीय महासचिव बनाए जाने के बाद ही सुनील बंसल को पश्चिम बंगाल का जिम्मा सौंपा गया था. हालांकि, बंगाल चुनाव में जीत के लिए उन्होंने उत्तर प्रदेश की अपनी पुरानी टीम पर ही भरोसा जताया.

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पिछले छह महीनों से उत्तर प्रदेश के दर्जनभर भाजपा नेता सुनील बंसल की कोर टीम का हिस्सा रहे और बंगाल के कोने-कोने में चुपचाप काम करते रहे. अब उनकी इस ‘टीम यूपी’ ने भाजपा को बंगाल में जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई है.

अब आइए, उत्तर प्रदेश के संगठन की उस टीम के प्रमुख चेहरों को जान लेते हैं, जो सुनील बंसल के साथ ‘मिशन बंगाल’ में कई महीनों से सक्रिय थे और माइक्रो मैनेजमेंट को मजबूत कर रहे थे. इन नेताओं की जिम्मेदारी हर बूथ पर माइक्रो मैनेजमेंट, डाटा प्लानिंग, बूथ प्रबंधन और कार्यकर्ताओं के बीच मतभेदों को खत्म करना थी.

उत्तर प्रदेश से योगी सरकार के चार मंत्री, एक पूर्व कैबिनेट मंत्री और लगभग 1500 प्रमुख कार्यकर्ता पिछले अक्टूबर से ही बंगाल में डटे हुए थे.

जेपीएस राठौर – सहकारिता मंत्री, योगी सरकार

उत्तर प्रदेश में 2017, 2019 और 2022 के चुनावों में बीजेपी के चुनावी मैनेजमेंट कंट्रोल रूम की जिम्मेदारी संभालने वाले जेपीएस राठौर पिछले छह महीनों से लखनऊ नहीं लौटे. वह योगी सरकार में मंत्री हैं, लेकिन बंगाल चुनाव की जिम्मेदारी के कारण वहीं डटे रहे. जेपीएस राठौर को माइक्रो लेवल प्लानिंग और बूथ मैनेजमेंट का विशेषज्ञ माना जाता है. उन्हें पूर्वी और पश्चिमी मेदिनीपुर की 35 विधानसभा सीटों की जिम्मेदारी दी गई थी. एक दिन पहले उन्होंने कहा था कि हमारा आंकड़ा 180 के नीचे नहीं रुकेगा, यह और कितना ऊपर जाएगा, यह कहना मुश्किल है.

सुरेश राणा – पूर्व कैबिनेट मंत्री, योगी सरकार

पश्चिमी उत्तर प्रदेश से आने वाले सुरेश राणा पिछली योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं. साल 2022 में वे अपना चुनाव हार गए थे. संगठन कौशल के लिए पहचाने जाने वाले सुरेश राणा कई महीनों से बंगाल में सक्रिय थे. उनके पास उत्तर 24 परगना की कई विधानसभा सीटों की जिम्मेदारी थी.

इसके अलावा कन्नौज से पूर्व सांसद सुब्रत पाठक, मंत्री संजय गंगवार, दिनेश खटीक और दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ भी कई महीनों से बंगाल में सक्रिय थे. सुब्रत पाठक को हुगली जिले की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. योगी सरकार में स्वतंत्र प्रभार मंत्री दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ दमदम लोकसभा क्षेत्र और उससे जुड़ी विधानसभा सीटों का कार्य देख रहे थे.

योगी सरकार के पूर्व मंत्री उपेंद्र तिवारी को हावड़ा में तैनात किया गया था, जबकि पूर्व मंत्री स्वाति सिंह को कोलकाता की कई विधानसभा सीटों की जिम्मेदारी दी गई थी.

उत्तर प्रदेश की 2017 की जीत में इलेक्शन माइक्रो मैनेजमेंट और वैज्ञानिक चुनावी रणनीति सुनील बंसल की कार्यशैली का अहम हिस्सा रही थी. उन्होंने उसी रणनीति को अपनी ‘टीम यूपी’ के साथ बंगाल में भी दोहराया.

बंगाल की जीत के बाद सुनील बंसल के लिए आगे क्या?

माना जा रहा है कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी सुनील बंसल को बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है. संभावना है कि उन्हें उत्तर प्रदेश का प्रभार सौंपा जाए.

आपको बता दें कि 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान, जब अमित शाह उत्तर प्रदेश के प्रभारी बने थे, तभी उन्होंने पहली बार सुनील बंसल के संगठन कौशल को पहचाना था. उस चुनाव में बंसल ने अहम भूमिका निभाई थी.

इसके बाद 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव और 2019 के लोकसभा चुनाव में मिली प्रचंड जीत का श्रेय भी उनके खाते में गया. यहां तक कि 2022 के विधानसभा चुनाव में भी वे भाजपा के संगठन महामंत्री रहे. अब बंगाल की जीत के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि 2027 के चुनाव में भी उन्हें बड़ी भूमिका मिल सकती है.