अखिलेश यादव और बृजभूषण सिंह के बीच क्या पक रही है कोई खिचड़ी? इनसाइड स्टोरी कहीं चौंका न दे आपको!

UP Political News: यूपी तक के खास शो 'आज का यूपी' में देखें बृजभूषण शरण सिंह के सपा में जाने की चर्चा और अखिलेश यादव के साथ पक रही सियासी खिचड़ी का पूरा विश्लेषण.

Photo: Brijbhushan Sharan Singh and Akhilesh Yadav

कुमार अभिषेक

01 May 2026 (अपडेटेड: 01 May 2026, 09:15 AM)

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UP Political News: यूपी Tak का खास शो 'आज का यूपी' राज्य की राजनीतिक हलचल और बड़े मुद्दों के विश्लेषण के लिए जाना जाता है. इस शो के आज के अंक में हम राज्य की तीन बड़ी खबरों का विस्तार से विश्लेषण करेंगे. आज की पहली बड़ी खबर भाजपा पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह और सपा अखिलेश यादव के बीच पक रही सियासी खिचड़ी से जुड़ी है, जिसमें यह सवाल उठ रहा है कि क्या बाहुबली नेता बीजेपी का साथ छोड़ सपा की साइकिल पर सवार होंगे. दूसरी खबर बृजभूषण की चुनावी महत्वाकांक्षाओं और परिवार के राजनीतिक विस्तार को लेकर है, जिसमें उनकी बेटी की भी चुनावी मैदान में उतरने की चर्चा है. वहीं तीसरी अहम खबर बीजेपी पर दबाव की रणनीति और सपा के 'पीडीए' (PDA) नैरेटिव के बीच फंसी इस सियासी उलझन के विश्लेषण पर आधारित है.

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बृजभूषण और अखिलेश, क्या पक रही है नई सियासी खिचड़ी?

इन दिनों उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में एक ही चर्चा सबसे ऊपर है क्या बृजभूषण शरण सिंह भारतीय जनता पार्टी छोड़ने वाले हैं? यह सवाल तब और गहरा गया जब सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने उन्हें 'हमारे गोंडा वाले नेताजी' कहकर संबोधित किया. बृजभूषण ने अभी तक इन खबरों का कोई औपचारिक खंडन नहीं किया है, बल्कि उनके हालिया बयानों से बीजेपी के प्रति नाराजगी साफ झलक रही है. बिहार के भागलपुर में उन्होंने यहां तक कह दिया कि अगर वह पार्टी के लिए बोझ बन गए हैं, तो उन्हें बता दिया जाए, वह 2027 और 2029 में अपनी ताकत दिखा देंगे. अखिलेश यादव के प्रति उनकी नरमी और सपा की चुप्पी ने इस चर्चा को हवा दे दी है कि आने वाले समय में गोंडा के इस क्षत्रप का नया सियासी ठिकाना समाजवादी पार्टी हो सकता है.

चुनावी महत्वाकांक्षा और परिवार का विस्तार, क्या है असली प्लान?

बृजभूषण शरण सिंह की सियासत को लेकर एक बात स्पष्ट है कि वह घर बैठने वाले नेताओं में से नहीं हैं. हालांकि बीजेपी ने उनके दोनों बेटों (प्रतीक भूषण और करण भूषण) को क्रमशः विधायक और सांसद बनाकर राजनीतिक रूप से सुरक्षित कर दिया है, लेकिन बृजभूषण की खुद की महत्वाकांक्षा अब भी बरकरार है. वह एक बार फिर सदन (संसद) जाने की इच्छा सार्वजनिक कर चुके हैं. इसके साथ ही, अब उनकी बेटी की भी राजनीतिक सक्रियता नोएडा और अन्य क्षेत्रों में देखी जा रही है, जो भविष्य में चुनाव लड़ने का संकेत दे रही है. माना जा रहा है कि बीजेपी में एक ही परिवार के इतने सदस्यों को टिकट मिलना लगभग असंभव है, इसलिए वह सपा की ओर रुख कर सकते हैं, जहां उन्हें अपने करीबियों के लिए ज्यादा चुनावी सीटें मिलने की उम्मीद हो सकती है.

बीजेपी का दबाव या सपा की मजबूरी, पीडीए बनाम बाहुबल

बृजभूषण शरण सिंह के लिए बीजेपी छोड़ना और अखिलेश यादव के लिए उन्हें अपनाना, दोनों ही आसान काम नहीं हैं. बृजभूषण के खिलाफ अभी दिल्ली में गंभीर मुकदमे चल रहे हैं, ऐसे में सत्ताधारी दल से पूरी तरह नाता तोड़ना उनके लिए कानूनी और प्रशासनिक चुनौतियां पैदा कर सकता है. दूसरी तरफ, अखिलेश यादव के सामने पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) का अपना बड़ा नैरेटिव है. अगर वह एक बड़े ठाकुर नेता और बाहुबली छवि वाले बृजभूषण को साथ लाते हैं, तो उनके वर्चस्व विरोधी नारे पर सवाल उठ सकते हैं. फिलहाल, ऐसा प्रतीत होता है कि बृजभूषण इस चर्चा के जरिए बीजेपी पर दबाव बनाने की रणनीति अपना रहे हैं, ताकि वह मंत्रिमंडल विस्तार में अपने बेटे के लिए जगह या आगामी राज्यसभा चुनावों में अपनी दावेदारी को लेकर बेहतर मोलभाव कर सकें.

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