मायावती के लिए विधानसभा में सपा वालों से भिड़ गए सीएम योगी, गेस्ट हाउस कांड का जिक्र कर खूब सुनाया

यूपी विधानसभा में सीएम योगी ने 1995 के गेस्ट हाउस कांड का जिक्र कर सपा को घेरा. उन्होंने कहा कि महिलाओं का अपमान करने वालों को नारी गरिमा पर बोलने का हक नहीं है और बीजेपी ने ही मायावती की रक्षा की थी.

CM Yogi and Mayawati

गौरांशी श्रीवास्तव

30 Apr 2026 (अपडेटेड: 30 Apr 2026, 08:21 PM)

follow google news

उत्तर प्रदेश विधानसभा में महिला सशक्तिकरण पर आयोजित विशेष सत्र के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आक्रामक रूप देखने को मिला. महिला आरक्षण बिल के मुद्दे पर विपक्ष को घेरते हुए सीएम योगी ने साल 1995 की घटना का जिक्र करते हुए प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के साथ हुए कांड की भी चर्चा छेड़ी. उन्होंने समाजवादी पार्टी पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि जिस दल का इतिहास महिलाओं के अपमान से भरा हो उसे नारी गरिमा पर बात करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है.

यह भी पढ़ें...

स्टेट गेस्ट हाउस कांड का किया जिक्र

सदन को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा कि 'जब भी समाजवादी पार्टी की बात होती है तो 1995 की वह घटना अपने आप ही याद आ जाती है जब प्रदेश की पहली दलित मुख्यमंत्री मायावती के साथ स्टेट गेस्ट हाउस में दुर्व्यवहार हुआ था. उन्होंने सपा नेताओं के पुराने बयानों और उनके आचरण पर तंज कसते हुए पूछा कि आखिर वह किस प्रकार की नारी गरिमा की बात करते हैं?

बीजेपी ने निभाया था धर्म

इस दौरान सीएम योगी ने आगे कहा कि उस समय भारतीय जनता पार्टी ने ही यह स्टैंड लिया था कि एक दलित की बेटी को सम्मान मिलना चाहिए. उन्होंने कहा कि सपा की 'राक्षसी वृत्ति' पर लगाम लगाने के लिए उस समय बीजेपी का समर्थन आवश्यक था. उन्होंने कहा कि 'स्वर्गीय ब्रह्मदत्त द्विवेदी जी अपनी जान पर खेल के समाजवादी पार्टी के गुंडों से भिड़े थे स्टेट गेस्ट हाउस में. तब जाकर के तब जाकर के सुश्री मायावती जी सुरक्षित हो पाई थी. '

क्या था 1995 का गेस्ट हाउस कांड

उत्तर प्रदेश की राजनीति में स्टेट गेस्ट हाउस कांड 2 जून 1995 की वह घटना है जिसने दशकों तक समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के रिश्तों में कड़वाहट घोल दी थी. 1993 में 'मिले मुलायम-कांशीराम हवा में उड़ गए जय श्रीराम' के नारे के साथ सपा और बसपा ने मिलकर सरकार बनाई थी. मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री थे. लेकिन कुछ ही समय बाद दोनों दलों में मतभेद बढ़ने लगे.

2 जून 1995 की खौफनाक घटना

बसपा ने सरकार से समर्थन वापस लेने का फैसला किया जिससे मुलायम सरकार गिरने की कगार पर आ गई. इसी दौरान लखनऊ के मीराबाई मार्ग स्थित स्टेट गेस्ट हाउस के कमरा नंबर-1 में मायावती अपने विधायकों के साथ बैठक कर रही थीं. नाराज समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं और कथित गुंडों ने गेस्ट हाउस पर धावा बोल दिया. भीड़ ने बसपा विधायकों के साथ मारपीट की और मायावती पर हमला करने की कोशिश की. अपनी जान बचाने के लिए मायावती ने खुद को कमरे के अंदर बंद कर लिया था. आरोप है कि भीड़ दरवाजा तोड़कर उन्हें नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रही थी.

उस कठिन समय में भारतीय जनता पार्टी के नेता ब्रह्मदत्त द्विवेदी गेस्ट हाउस पहुंचे थे. उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना भीड़ का सामना किया और मायावती की सुरक्षा सुनिश्चित की. इसी घटना के बाद बीजेपी ने मायावती को समर्थन दिया और वह पहली बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं.