स्वामी प्रसाद मौर्य के बेटे उत्कर्ष के साथ पुलिस ने क्या किया? दरोगा की 'यादव' नेमप्लेट को लेकर भड़का था हंगामा

UP Political News: यूपी तक के शो 'आज का यूपी' में देखें फतेहपुर गैंगरेप मामले पर सियासी घमासान, उत्कर्ष मौर्य की पुलिस से भिड़ंत और सदन में राजभर बनाम अतुल प्रधान की तीखी बहस का पूरा विश्लेषण.

Swami Prasad Maurya

कुमार अभिषेक

02 May 2026 (अपडेटेड: 02 May 2026, 06:48 AM)

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UP Political News: यूपी तक तक का खास शो 'आज का यूपी' राज्य की राजनीतिक और सामाजिक हलचलों का सबसे सटीक विश्लेषण पेश करता है. आज के एपिसोड में हम राज्य की तीन बड़ी और अहम खबरों का विश्लेषण कर रहे हैं. सबसे पहले, फतेहपुर में मौर्य समाज की पीड़ित बेटी से मिलने पहुंचे स्वामी प्रसाद मौर्य के बेटे उत्कर्ष मौर्य और पुलिस के बीच हुई हाई-वोल्टेज भिड़ंत की खबर है, जिसमें दरोगा की नेमप्लेट पढ़ने के बाद विवाद जातिगत रंग लेता नजर आया. दूसरी खबर में हम दिखाएंगे कि कैसे उत्तर प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराधों का तेजी से 'सियासीकरण' और 'जातीकरण' हो रहा है, जहाँ हर घटना को 2027 के चुनावी चश्मे से देखा जा रहा है. अंत में, विधानसभा के भीतर ओम प्रकाश राजभर और सपा विधायक अतुल प्रधान के बीच हुई तीखी नोकझोंक का विश्लेषण करेंगे, जहाँ राजभर बीजेपी के लिए मोर्चा संभालते हुए अखिलेश यादव पर हमलावर नजर आए.

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फतेहपुर में उत्कर्ष मौर्य की पुलिस से भिड़ंत, 'यादव' नेमप्लेट पर भड़का हंगामा

फतेहपुर में मौर्य समाज की एक युवती के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म की घटना के बाद सियासी पारा चढ़ गया है. स्वामी प्रसाद मौर्य को लखनऊ में रोके जाने के बाद उनके बेटे उत्कर्ष मौर्य अपने समर्थकों के साथ पीड़ित परिवार से मिलने फतेहपुर पहुंचे. यहाँ पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया. विवाद तब और बढ़ गया जब भीड़ में मौजूद समर्थकों ने वहां तैनात दरोगा की नेमप्लेट पढ़कर उनके उपनाम (यादव) पर टिप्पणी कर दी. इसी हंगामे के बीच एक महिला पुलिस कांस्टेबल ने अपनी सख्त लताड़ से उपद्रवियों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया. पुलिस का कहना है कि उच्चाधिकारियों के आदेश के बिना किसी भी राजनीतिक दल को पीड़ित परिवार तक जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती.

यूपी में अपराधों का 'जातिवादी' एंगल, न्याय की मांग या 2027 की तैयारी?

राज्य में पिछले कुछ दिनों से महिलाओं के खिलाफ हो रही घटनाओं चाहे वह गाजीपुर का विश्वकर्मा परिवार का मामला हो, हरदोई का कुशवाहा समाज का मामला या फतेहपुर की घटना में एक नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है. विपक्षी दल इन घटनाओं को पिछड़ों और दलितों पर अन्याय बताकर इसे सीधे तौर पर जातियों के 'पिच' पर ले जा रहे हैं. सरकार का मानना है कि इन संवेदनशील मुद्दों के जरिए 2027 के चुनावों की जमीन तैयार की जा रही है और राजनीतिक दल अपनी 'सियासी रोटी' सेंकने की कोशिश कर रहे हैं. इस होड़ में असली न्याय के बजाय जातिगत गोलबंदी पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है, जिससे सामाजिक वैमनस्य का खतरा बढ़ गया है.

ओम प्रकाश राजभर का अखिलेश यादव पर प्रहार, अतुल प्रधान ने किया पलटवार

उत्तर प्रदेश विधानसभा के भीतर भी राजनीतिक तल्खी साफ देखी जा रही है. सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर इन दिनों बीजेपी से भी ज्यादा आक्रामक अंदाज में समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं. सदन में राजभर ने सपा पर पिछड़ों को धोखा देने का आरोप लगाया, जिसका सपा विधायक अतुल प्रधान ने कड़ा विरोध किया. दोनों नेताओं के बीच तीखी बयानबाजी हुई, जिसमें पुराने बयानों और दलबदल के मुद्दों को लेकर एक-दूसरे पर छींटाकशी की गई. राजभर का यह कड़ा रुख तब सामने आ रहा है जब अखिलेश यादव ने पूर्वांचल में उनके खिलाफ 'राजभर बनाम राजभर' की रणनीति के तहत सीमा राजभर को मैदान में उतार दिया है.

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