Itwa Vidhansabha 2027: उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले की इटवा विधानसभा सीट राज्य की सबसे चर्चित सीटों में से एक मानी जाती है. यहां मुख्य मुकाबला समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता और वर्तमान नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडे और भाजपा के पूर्व बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी के बीच रहता है. यहां सपा सात बार के विधायक माता प्रसाद पांडे के अनुभव और कार्यों के भरोसे हैं, वहीं भाजपा 2017 जैसी जीत दोहराने की रणनीति पर काम कर रही है.
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राजनीतिक इतिहास और पिछले चुनाव के नतीजे
इटवा विधानसभा सीट 1974 में अस्तित्व में आई थी. इस सीट पर माता प्रसाद पांडे का दबदबा रहा है, जिन्होंने 1980 से अब तक सात बार यहाँ से जीत दर्ज की है. वहीं बात करें पिछले चुनाव की तो साल 2002, 2007 और 2012 में माता प्रसाद पांडे (सपा) लगातार जीते. 2017 में भाजपा के डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी ने उन्हें हराकर बड़ा उलटफेर किया, जिसके बाद उन्हें राज्य मंत्री बनाया गया. हालांकि, 2022 में माता प्रसाद पांडे ने दोबारा वापसी करते हुए इस सीट पर कब्जा कर लिया.
जातीय समीकरण और मतदाता
इटवा में कुल मतदाताओं की संख्या 2,99,006 है. यहां का जातीय गणित जीत-हार में अहम भूमिका निभाता है.
प्रमुख जातियां: अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) लगभग 53,000, मुस्लिम लगभग 1,10,000, ब्राह्मण 37,000 और यादव लगभग 36,000 हैं.
अन्य वर्ग: कुर्मी (21,000), लोधी (10,000), ठाकुर (8,000), निषाद (8,000), वैश्य (7,000) और कायस्थ (6,000) मतदाता भी यहाँ निर्णायक भूमिका में हैं.
पक्ष-विपक्ष के दावे और जमीनी मुद्दे
माता प्रसाद पांडे (सपा): उन्होंने अपने कार्यकाल में सड़कों के जाल, स्कूलों के निर्माण, पुलों के विकास और राप्ती नदी पर बंधे बनवाकर क्षेत्र को बाढ़ मुक्त करने का श्रेय लिया. उनका मुख्य फोकस शिक्षा के विस्तार और भाईचारे पर रहा है. उनका कहना है कि अगली सरकार बनने पर वह क्षेत्र से पलायन रोकने के लिए उद्योग लगवाएंगे.
डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी (भाजपा): पूर्व मंत्री का दावा है कि 2017-2022 के छोटे से कार्यकाल में उन्होंने रिकॉर्ड विकास कार्य किए, जिनमें आईटीआई, पॉलिटेक्निक, अस्पताल की नई बिल्डिंग और नगर पंचायतों का निर्माण शामिल है. उनका आरोप है कि वर्तमान विधायक के होने से विकास बाधित हुआ है और वह हार के बावजूद जनता के बीच सक्रिय हैं.
पत्रकारों की राय और 2027 की चुनौती
स्थानीय पत्रकारों के अनुसार, इटवा में मुख्य मुकाबला सपा और भाजपा के बीच ही है. हालांकि, यदि कांग्रेस या कोई अन्य दल किसी मजबूत मुस्लिम चेहरे को मैदान में उतारता है, तो वोटों का ध्रुवीकरण भाजपा के पक्ष में जा सकता है. पत्रकारों का मानना है कि माता प्रसाद पांडे की छवि एक ईमानदार विधायक की है, जबकि सतीश द्विवेदी को उनके विकास कार्यों के लिए याद किया जाता है. 2027 के चुनाव में विकास और जातीय ध्रुवीकरण के बीच कड़ी टक्कर होने की उम्मीद है.
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