UP Kiska: किसके नाम होगी कुर्सी विधानसभा की सीट, क्या कहता है यहां का जातीय समीकरण?

Kursi Assembly 2027: बाराबंकी की कुर्सी विधानसभा सीट पर 2027 के चुनावी समीकरण बेहद पेचीदा हैं. भाजपा विधायक साकेन्द्र वर्मा विकास के भरोसे हैं तो सपा मात्र 217 वोटों की हार को जीत में बदलने के लिए कमर कस चुकी है.

Kursi Assembly 2027: सांकेतिक तस्वीर

मधुर यादव

05 May 2026 (अपडेटेड: 05 May 2026, 03:01 PM)

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Kursi Assembly 2027: उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले की कुर्सी विधानसभा सीट प्रदेश की सबसे दिलचस्प सीटों में शुमार है. यहां भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस जैसी पार्टियां सत्ता हासिल करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंकती नजर आती हैं. औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित यह सीट जितनी आर्थिक रूप से मजबूत है, उतनी ही राजनीतिक रूप से जातीय और सामाजिक समीकरणों में उलझी हुई है. 2022 के चुनाव में यहां मात्र 217 वोटों के अंतर ने हार-जीत का फैसला किया था जिसने 2027 की लड़ाई को और भी रोमांचक बना दिया है.

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जातीय और मतदाता समीकरण

कुर्सी विधानसभा क्षेत्र में जातीय संरचना हार-जीत में निर्णायक भूमिका निभाती है.

मुस्लिम मतदाता: करीब 80 हजार मतदाताओं के साथ यह वर्ग यहाँ सबसे बड़ा निर्णायक कारक है.

दलित और ओबीसी: दलितों में गौतम, रावत और पासी समुदाय का लगभग 70 हजार वोट बैंक प्रभावी है। वहीं ओबीसी वर्ग में कुर्मी और जैसवाल जातियों को जीत की चाबी माना जाता है.

मतदाताओं की संख्या: 2022 में यहां लगभग 4 लाख मतदाता थे, जो नए समीकरणों के बाद 2027 के लिए 3,69,606 रह गए हैं.

राजनीतिक इतिहास और मौजूदा स्थिति

परिसीमन से पहले यह फतेहपुर सीट का हिस्सा थी. 2012 में यहां सपा के फरीद महफूज किदवई जीते थे. लेकिन 2017 से यहां भाजपा का दबदबा बढ़ा है.

2017 और 2022 में भाजपा के साकेन्द्र प्रताप वर्मा ने यहां जीत दर्ज की. 2022 में सपा के राकेश कुमार वर्मा (पूर्व मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा के बेटे) को साकेन्द्र प्रताप ने मात्र 217 वोटों के मामूली अंतर से हराया था.

मौजूदा भाजपा विधायक साकेन्द्र प्रताप वर्मा का कहना है कि 2017 से 2027 का दशक कुर्सी के लिए स्वर्णिम काल रहा है.उन्होंने अपने कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाईं. 

शिक्षा व स्वास्थ्य: 600 से अधिक सड़कें, 3 पावर सबस्टेशन, 5 पशु चिकित्सालय और एक पीएचसी का निर्माण.

पर्यटन व बुनियादी ढांचा: तीर्थ स्थलों का सुंदरीकरण और फतेहपुर में जाम की समस्या के लिए बाईपास का निर्माण (88% मुआवजा वितरित)

विपक्ष की रणनीति

माजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष हाफिज अयाज अहमद का दावा है कि 2022 में प्रत्याशी को कम समय मिला था. फिर भी उन्होंने ऐतिहासिक वोट हासिल किए. सपा अब 2027 के लिए बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत कर रही है ताकि पिछली सूक्ष्म हार को बड़ी जीत में बदला जा सके.

पत्रकारों का आंकलन

वरिष्ठ पत्रकारों के अनुसार, कुर्सी का मुकाबला हमेशा असमंजस भरा रहता है. पिछली बार छोटे दलों के प्रत्याशियों ने जो वोट काटे, वही हार-जीत का बड़ा कारण बने. 2027 में यदि मुस्लिम-दलित-कुर्मी समीकरण सपा के पक्ष में जाता है, तो भाजपा के लिए राह कठिन हो सकती है. लेकिन भाजपा अपने विकास कार्यों और संगठनात्मक पकड़ के भरोसे है.