UP Political News: उत्तर प्रदेश की राजनीति में चुनावी रणनीतियों को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. समाजवादी पार्टी ने देश की सबसे चर्चित चुनाव प्रबंधन कंपनी I-PAC से अपना रिश्ता खत्म कर लिया है. पार्टी सूत्रों के अनुसार, अब अखिलेश यादव चुनाव प्रबंधन के लिए किसी बाहरी एजेंसी के बजाय 'अपनों' पर ही भरोसा करेंगे.
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क्या ममता और स्टालिन की हार बनी मुख्य वजह?
ऐसी चर्चा है कि पार्टी के थिंक टैंक ने यह फैसला बंगाल और तमिलनाडु के हालिया चुनावी नतीजों को देखते हुए लिया है. पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी और तमिलनाडु में एमके स्टालिन की चुनावी हार (जहां I-PAC प्रबंधन कर रही थी) को देखने के बाद अखिलेश यादव ने इस संस्था से दूरी बनाना ही बेहतर समझा है. पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि जिन राज्यों में यह संस्था चुनाव मैनेज कर रही थी, वहां के नतीजों के बाद अब साथ चलना संभव नहीं है. इसकी जानकारी संस्था को भी दे दी गई है.
छापेमारी के बाद बदल गया था अखिलेश यादव का मन?
I-PAC से मोहभंग होने के पीछे केवल हार ही नहीं, बल्कि कुछ पुरानी घटनाएं भी जिम्मेदार बताई जा रही हैं. जानकारी मिली है कि
जिस दिन I-PAC की टीम समाजवादी पार्टी कार्यालय में अपना प्रेजेंटेशन दे रही थी, ठीक उसी दिन कोलकाता स्थित उनके दफ्तर पर छापे पड़ रहे थे. प्रेजेंटेशन के दौरान ही पड़े इन छापों ने अखिलेश यादव का 'जायका' खराब कर दिया था. तभी से पार्टी नेतृत्व इस उलझन में था कि क्या आईपैक को साथ लेना कहीं भविष्य में भारी न पड़ जाए.
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर पार्टी की ओर से कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है. न तो I-PAC से रिश्ता जोड़ने पर कभी आधिकारिक बयान आया था और न ही अब संबंध टूटने पर पार्टी की ओर से कुछ कहा गया है. पार्टी के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि भले ही सपा इसे आधिकारिक तौर पर स्वीकार न करें, लेकिन अब I-PAC के साथ चुनाव में जाने की संभावनाओं पर पूरी तरह मुहर लग गई है कि वे साथ नहीं चलेंगे.
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