Babina Assembly Election 2027: उत्तर प्रदेश की सियासत में बुंदेलखंड की बबीना विधानसभा सीट (झांसी) हमेशा से बेहद दिलचस्प रही है. यह एक ऐसी सीट है जहां कभी बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का एकछत्र राज हुआ करता था. लेकिन जब से यहां कमल खिला है बीजेपी लगातार जीत दर्ज कर रही है. वर्तमान में यहां से राजीव सिंह पारच्छा लगातार दो बार से बीजेपी के विधायक हैं. आधा शहर और आधा गांव में बंटी इस अनूठी सीट पर क्या विधायक जी तीसरी बार टिकट पाकर जीत की हैट्रिक लगा पाएंगे? क्या समाजवादी पार्टी का पीडीए समीकरण यहां बीजेपी के किले को ढहा पाएगा? आइए समझते हैं बबीना सीट का पूरा सियासी और जातीय गणित.
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बसपा के गढ़ में बीजेपी की सेंधमारी
पिछले पांच चुनावों के इतिहास पर नजर डालें, तो बबीना सीट मुख्य रूप से बसपा और बीजेपी के बीच घूमती रही है.
2002 और 2007: बसपा के रतन लाल अहिरवार यहां से विधायक चुने गए.
2012: बसपा के ही कृष्णपाल सिंह राजपूत ने इस सीट पर जीत दर्ज की.
2017 और 2022: बीजेपी के राजीव सिंह पारच्छा ने लगातार दो बार जीत हासिल कर बसपा के इस अभेद्य किले को ढहा दिया.
विवादों से भी रहा नाता
विधायक राजीव सिंह पारच्छा का कार्यकाल जहां विकास कार्यों के लिए जाना गया, वहीं उनके और उनके समर्थकों पर वंदे भारत ट्रेन में मारपीट के आरोप भी लगे, जिसने खूब सुर्खियां बटोरी थीं.
विधायक का दावा: "2000 करोड़ से बदली बुंदेलखंड की सूरत"
अपनी उपलब्धियों और तीसरी बार जीत के भरोसे को लेकर वर्तमान बीजेपी विधायक राजीव सिंह पारच्छा का कहना है कि सरकार ने क्षेत्र में अभूतपूर्व काम किया है.
पेयजल संकट का अंत: बुंदेलखंड की सबसे बड़ी समस्या पानी की थी. सरकार ने करीब 2,000 करोड़ रुपये खर्च कर 'हर घर नल, हर घर जल' योजना से इस समस्या को हमेशा के लिए खत्म कर दिया है.
सड़क और बिजली: हर गांव को बारहमासी पक्की सड़कों से जोड़ा गया है. गांवों में 18 से 20 घंटे सुचारू बिजली दी जा रही है और किसानों के लिए एग्रीकल्चर फीडर बनाए गए हैं.
शिक्षा में सुधार: पिछले 7-8 सालों में बबीना क्षेत्र में लगभग 5 राजकीय विद्यालय और नए डिग्री कॉलेज बनाए गए हैं.
कानून व्यवस्था: थानों में हर गरीब को इंसाफ मिल रहा है जिससे जनता बेहद खुश है और तीसरी बार भी भारी बहुमत से बीजेपी की जीत तय है.
नंबर दो की पार्टी सपा को 'पीडीए' पर भरोसा
पिछले चुनाव में दूसरे नंबर पर रही समाजवादी पार्टी यहां 2027 के चुनाव को लेकर बेहद आश्वस्त नजर आ रही है. सपा नेताओं का कहना है कि 'हमारी बबीना विधानसभा में बूथ स्तर तक मजबूत तैयारी है. आने वाले चुनाव में हम बड़े अंतर से जीतेंगे क्योंकि 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समाज पूरी तरह से समाजवादी पार्टी के साथ लामबंद है.'
बबीना सीट का जातीय समीकरण
बबीना विधानसभा सीट वैसे तो दलित बाहुल्य मानी जाती है. लेकिन बीजेपी के विधायक यादव समुदाय से आते हैं जो सपा के पारंपरिक वोट बैंक में बड़ी सेंधमारी करते हैं. क्षेत्र का अनुमानित जातीय गणित इस प्रकार है.
| समुदाय / जाति | अनुमानित संख्या |
|---|---|
| दलित (अहिरवार और कोरी बाहुल्य) | ~ 80,000 |
| यादव | ~ 35,000 |
| क्षत्रिय | ~ 25,000 |
| कुशवाहा | ~ 25,000 |
| ब्राह्मण | ~ 20,000 |
| लोधी | ~ 15,000 |
| मुस्लिम | ~ 12,000 |
चुनाव का ट्रेंड
बीजेपी यहां यादव उम्मीदवार उतारकर सपा के कोर वोटर में सेंध लगाती है. इसके साथ ही ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और लोध मतदाताओं का एकमुश्त ध्रुवीकरण बीजेपी के पक्ष में जाता है जिससे बीजेपी की जीत का मार्जिन बढ़ जाता है.
क्या कहते हैं स्थानीय पत्रकार?
क्षेत्र के वरिष्ठ पत्रकारों और राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बबीना सीट पर फिलहाल बीजेपी का पलड़ा भारी ('अपर हैंड') दिखाई दे रहा है. बीजेपी ने रणनीतिक रूप से विपक्ष (सपा और बसपा) के उन स्थानीय चेहरों को अपने पाले में कर लिया है, जिनका अपना मजबूत व्यक्तिगत जनाधार था.
सपा बनाम बसपा का पेच
विश्लेषकों का मानना है कि यहां सपा का 'पीडीए' कार्ड शायद उतना कारगर न हो बल्कि मुख्य मुकाबले में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ज्यादा बेहतर स्थिति में आ सकती है. हालांकि, स्थानीय स्तर पर जमीन की खरीद-फरोख्त को लेकर जनता में कुछ नाराजगी भी देखी जा रही है.
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