'ओवैसी बड़े भाई और चंद्रशेखर हमदर्द'... कांग्रेस के इस बड़े नेता के बयान बाद क्या सपा पर बनेगा दबाव, बदल जाएंगे सारे समीकरण?

Congress Alliance Plan In UP: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां अभी से तेज होती नजर आ रही हैं. समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन की चर्चाओं के बावजूद सीट बंटवारे का मुद्दा अब तक पूरी तरह साफ नहीं हो पाया है.

Congress Alliance Plan For UP

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कुमार अभिषेक

• 04:32 PM • 16 Jun 2026

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Uttar Pradesh Politics: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां अभी से तेज होती नजर आ रही हैं. समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन की चर्चाओं के बावजूद सीट बंटवारे का मुद्दा अब तक पूरी तरह साफ नहीं हो पाया है. इसी बीच कांग्रेस की ओर से ऐसे राजनीतिक संकेत मिलने लगे हैं, जिन्होंने प्रदेश की सियासत में नई बहस छेड़ दी है. सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के बयानों ने यह चर्चा तेज कर दी है कि कांग्रेस, दलित नेता चंद्रशेखर आजाद और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के साथ भी संभावित गठबंधन की संभावनाएं तलाश रही है. राजनीतिक जानकार इसे कांग्रेस की नई रणनीति के साथ-साथ सपा पर दबाव बनाने की कोशिश के तौर पर भी देख रहे हैं.

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इमरान मसूद के बयान से बदला सियासी समीकरण

इमरान मसूद ने बातचीत के दौरान कहा कि उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी को कोई भी दल अकेले दम पर नहीं हरा सकता. उन्होंने कहा कि जो लोग इस भ्रम में हैं कि वे राहुल गांधी का साथ लिए बिना बीजेपी को मात दे देंगे, उन्हें अपनी गलतफहमी दूर कर लेनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस गठबंधन को लेकर अपनी अलग रणनीति तैयार कर रही है और पार्टी की 'तरकश में अभी बहुत तीर बाकी हैं.' इसी दौरान उन्होंने एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी को अपना 'बड़ा भाई' बताया, जबकि आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद को अपना 'दोस्त और हमदर्द' कहा. हालांकि गठबंधन के सवाल पर उन्होंने अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व पर छोड़ दिया.

क्या कांग्रेस लिख रही है नई गठबंधन की स्क्रिप्ट?

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस एक तरफ ए ग्रेड की लगभग 170 सीटों पर अपनी दावेदारी की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर छोटे दलों को साथ लेने के संकेत भी दे रही है. ऐसे में यह सवाल उठने लगा है कि क्या कांग्रेस सपा के साथ गठबंधन बनाए रखते हुए अपने राजनीतिक विकल्प खुले रखना चाहती है. इमरान मसूद के बयानों से यह संकेत भी मिलता है कि कांग्रेस खुद को गठबंधन में कमजोर साझेदार के तौर पर पेश नहीं करना चाहती. पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि उसके पास अन्य राजनीतिक विकल्प भी मौजूद हैं और वह अपने दम पर नई राजनीतिक इबारत लिखने की क्षमता रखती है.

ओवैसी और चंद्रशेखर को लेकर बदले तेवर

दिलचस्प बात यह है कि जिन असदुद्दीन ओवैसी को कांग्रेस के कई नेता पहले बीजेपी की 'B-टीम' बताते रहे हैं, उन्हीं ओवैसी को अब इमरान मसूद ने अपना बड़ा भाई बताया है. हालांकि उन्होंने साफ किया कि गठबंधन का फैसला पार्टी नेतृत्व ही करेगा. उधर, ओवैसी ने भी 2027 चुनाव को लेकर अपनी सक्रियता बढ़ा दी है. उन्होंने मुस्लिम बहुल बहराइच जिले की मटेरा विधानसभा सीट से चुनावी अभियान की शुरुआत करते हुए पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली को उम्मीदवार घोषित कर दिया है. ओवैसी की बढ़ती सक्रियता के बीच कांग्रेस के नरम रुख को राजनीतिक हलकों में अहम संकेत माना जा रहा है.

चंद्रशेखर के साथ पुराने रिश्तों का जिक्र

सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने चंद्रशेखर आजाद के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि साल 2024 के लोकसभा चुनाव में चंद्रशेखर ने उनकी मदद की थी और वे चाहते हैं कि चंद्रशेखर आगे बढ़ें और तरक्की करें. उन्होंने यह भी कहा कि 'हमसे जो बन पड़ेगा, हम करेंगे.' हालांकि उन्होंने गठबंधन को लेकर कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की, लेकिन उनके बयान ने राजनीतिक अटकलों को जरूर हवा दे दी. गौरतलब है कि चंद्रशेखर आजाद ने भी 2022 विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन की कोशिश की थी, लेकिन बात नहीं बन सकी थी.

क्या सपा पर दबाव बनाने की कोशिश है?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस की यह रणनीति समाजवादी पार्टी पर दबाव बनाने का एक तरीका भी हो सकती है. सपा और कांग्रेस दोनों का एक बड़ा वोट बैंक मुस्लिम समुदाय से जुड़ा माना जाता है और सीट बंटवारे को लेकर दोनों दलों के बीच मतभेद की खबरें भी सामने आती रही हैं.

इमरान मसूद ने यह भी याद दिलाया कि साल 2022 के चुनाव में उन्हें और चंद्रशेखर आजाद दोनों को काफी 'जिल्लत' उठानी पड़ी थी, जिसका इशारा उन्होंने समाजवादी पार्टी नेतृत्व की ओर माना. ऐसे में अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव में सपा के साथ तालमेल मजबूत करती है या फिर चंद्रशेखर आजाद और ओवैसी जैसे नेताओं के साथ मिलकर उत्तर प्रदेश की सियासत में गठबंधन की नई पटकथा लिखती है.