क्या वाकई कटने जा रहे हैं 225 भाजपा विधायकों के टिकट? चुनाव से पहले अखिलेश के दावे के बाद मची खलबली

Akhilesh Yadav News: उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा इंफ्रास्ट्रक्चर विभाग की कमान संभालने और उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीडा) को सीधे अपने अधीन लाने के फैसले के बाद समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भाजपा पर बड़ा हमला बोला है.

Akhilesh Yadav

अखिलेश यादव

आशुतोष चौबे

13 Jun 2026 (अपडेटेड: 13 Jun 2026, 08:27 AM)

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Akhilesh Yadav Claim On BJP Ticket Change: उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा इंफ्रास्ट्रक्चर विभाग की कमान संभालने और उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीडा) को सीधे अपने अधीन लाने के फैसले के बाद समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भाजपा पर बड़ा हमला बोला है. अखिलेश ने दावा किया है कि भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बड़ी संख्या में अपने उम्मीदवारों को बदलने की तैयारी कर रही है. उनके इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है.

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यूपीडा में बदलाव के बाद अखिलेश का हमला

8 जून 2026 को हुए प्रशासनिक बदलाव में उद्योग मंत्री नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी' को यूपीडा की जिम्मेदारी से अलग कर दिया गया. अब यूपीडा सीधे मुख्यमंत्री के इंफ्रास्ट्रक्चर विभाग के अधीन आ गया है. सरकार का कहना है कि यह फैसला विभागीय कार्यों में बेहतर समन्वय और दोहराव खत्म करने के उद्देश्य से लिया गया है. पहले यूपीडा औद्योगिक विभाग के तहत काम करता था और फाइलें संबंधित मंत्री के पास जाती थीं, लेकिन अब प्रस्ताव सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय से गुजरेंगे. इसी फैसले को लेकर अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा.

225 सीटों पर टिकट बदलने का दावा

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भाजपा की चुनावी रणनीति को लेकर कई दावे किए. उन्होंने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन के प्रदर्शन, बेरोजगारी, महंगाई, पेपर लीक और जनता की नाराजगी का असर भाजपा पर पड़ रहा है. उनका दावा है कि भाजपा करीब 225 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार बदल सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि कई मौजूदा विधायक खुद चुनाव लड़ने के इच्छुक नहीं हैं क्योंकि उन्हें जीत की उम्मीद नहीं दिखाई दे रही है. उन्होंने पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा का पारंपरिक वोट बैंक भी कमजोर हुआ है.

एक्सप्रेसवे को लेकर भी सियासत तेज

उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे जैसे कई बड़े प्रोजेक्ट्स को लेकर भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच लंबे समय से राजनीतिक टकराव रहा है. योगी सरकार इन्हें विकास की पहचान बताती है, जबकि विपक्ष इन परियोजनाओं में गुणवत्ता और भ्रष्टाचार के आरोप लगाता रहा है. अखिलेश यादव अपनी सरकार के दौरान शुरू हुई परियोजनाओं का श्रेय लेते हैं, जबकि भाजपा इन्हें पूरा करने और नए प्रोजेक्ट्स लाने का दावा करती है. अब यह मुद्दा 2027 के चुनावी समीकरण और टिकट वितरण की चर्चाओं से भी जुड़ गया है.

अखिलेश यादव का पूरा ट्वीट

"अभी हाफ़ हुए हैं, विधानसभा में टिकट नहीं मिलेगा तो साफ़ हो जाएंगे. जब सारे ‘घटिया एक्सप्रेसवे’ बन गये और भ्रष्टाचार का आपसी लेनदेन का टारगेट पूरा हो गया तब हटाया तो क्या हटाया?

सुना है इलाहाबाद की सारी सीटों पर भाजपा अपने प्रत्याशी बदलने जा रही है क्योंकि भाजपा को लगता है कि ये सारे विधायक और प्रत्याशी केवल खाने-कमाने में लगे रहे और लोकसभा सीट हाथ से निकल गई.

यही फ़ार्मूला उप्र की उन सभी 43 लोकसभा सीटों पर लागू किया जा रहा है जहाँ इंडिया गठबंधन की जीत हुई थी और बाक़ी उन 9-10 सीटों पर भी जहाँ भाजपा हेरफेर करके सर्टिफ़िकेट से जीती थी, वोट से नहीं.

इसका मतलब तो ये हुआ कि लगभग 225 सीटों पर प्रत्याशी बदले जाएंगे. वैसे तो सुना है कि भाजपा के वर्तमान विधायक ख़ुद भी चुनाव नहीं लड़ना चाहते हैं क्योंकि ‘पीडीए’ के सामने उनके जीतने की कोई भी उम्मीद नहीं बची है. भाजपा के मूल वोटर अब एक-चौथाई भी नहीं रह गये हैं, इसीलिए भाजपा के वर्तमान विधायक हारे हुए चुनाव में अपनी कमाई ख़र्च नहीं करना चाहते हैं बल्कि बाक़ी जीवन के लिए पैसे बचाकर रखना चाहते हैं क्योंकि उनको ये भी पता है कि इस बार भाजपा पक्का जाएगी और फिर कभी नहीं आएगी.

दरअसल भाजपा के वर्तमान विधायकों ने जनता के आक्रोश को पढ़ लिया है क्योंकि भाजपा की महा-भ्रष्ट, बेईमान और दमनकारी नीतियों की वजह से आई हर तरह की दिक़्क़तों जैसे दिनदहाड़े की लूट, रंगदारी, हत्या, ज़मीनों की क़ब्ज़ेबाज़ी, घूसख़ोरी-कमीशनख़ोरी, महंगाई, बेरोज़गारी, पीडीए पर अत्याचार, पक्षपात, सांप्रदायिक राजनीति की वजह से हो रही नाइंसाफ़ी, पेपर लीक, संविधान की अवहेलना, आरक्षण की हक़मारी, युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ व महिलाओं के प्रति बेतहाशा बढ़ते अपराध, चुनावी हेराफेरी और चंदा-चढ़ावा चोरी की वजह से जन-जन का गुस्सा उबाल-उफ़ान पर आ चुका है."