कौन हैं यूपी के सबसे ज्यादा केस वाले टॉप 5 विधायक? जानिए सपा से लेकर भाजपा तक के नेताओं की पूरी लिस्ट

Top Criminal MLA In UP News: उत्तर प्रदेश 2022 विधानसभा चुनाव रिपोर्ट में कई विधायकों पर आपराधिक मामले दर्ज है. ADR आंकड़ों के अनुसार टॉप 5 नेता सबसे ज्यादा केस वाले हैं. इनमें सपा और भाजपा दोनों दलों के विधायक शामिल हैं.

Top 5 MLAs in UP With The Highest Number Of Cases

Top 5 MLAs in UP With The Highest Number Of Cases (Photo: AI Generated)

आशुतोष चौबे

• 04:36 PM • 12 Jun 2026

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Top 5 Criminal MLA UP News: उत्तर प्रदेश की राजनीति में अब चुनाव सिर्फ सत्ता बदलने की लड़ाई नहीं रह गई है, बल्कि यह भी बड़ा मुद्दा बन गया है कि कौन सा उम्मीदवार किस तरह के आपराधिक मामलों से जुड़ा रहा है. चुनावी नतीजों के साथ-साथ नेताओं का बैकग्राउंड भी लोगों की नजरों में रहने लगा है. साल 2022 के विधानसभा चुनाव में कई ऐसे विधायक चुने गए जिनके खिलाफ अलग-अलग मामलों की संख्या काफी ज्यादा थी. अब जैसे-जैसे यूपी विधानसभा चुनाव करीब आ रहा है, वैसे-वैसे नेताओं के पुराने रिकॉर्ड, उनके मुकदमे और उनका राजनीतिक सफर फिर से चर्चा में आ गया है. सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हर जगह अब नेताओं की छवि और उनके बैकग्राउंड को लेकर बहस है.

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इसी वजह से चुनावी हलफनामे (Affidavit) और ADR (Association for Democratic Reforms) की रिपोर्ट्स इन दिनों काफी चर्चा में हैं. चुनाव आयोग को दिए गए हलफनामों के आधार पर देखें तो साल 2022 में चुने गए यूपी विधानसभा के कई विधायक ऐसे हैं जिनके खिलाफ 7 से लेकर 38+ आपराधिक मामले दर्ज हैं. इसी रिपोर्ट के आधार पर अब यह सवाल भी चर्चा में है कि कौन हैं यूपी के सबसे ज्यादा केस वाले टॉप 5 विधायक, जिन पर सबसे ज्यादा केस दर्ज हैं? आईए आपको खबर में आगे पूरी सूची बताते हैं.

टॉप 5 विधायक किस पार्टी से?

अब अगर हम टॉप 5 विधायकों की बात करें तो इनमें खास बात यह है कि ये सभी समाजवादी पार्टी (सपा) से आते हैं और लगातार चर्चा में रहते हैं.

1. अतुल प्रधान (सरधना, मेरठ) - 38 केस

मेरठ की सरधना सीट से समाजवादी पार्टी के विधायक अतुल प्रधान के नाम पर कुल 38 आपराधिक मामले दर्ज हैं. ये मामले ADR रिपोर्ट के मुताबिक अलग-अलग समय पर दर्ज हुए हैं, जिनमें ज्यादातर केस राजनीतिक प्रदर्शन, धरना-प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के दौरान हुए विवादों से जुड़े बताए जाते हैं. इसके अलावा कुछ मामले सार्वजनिक जगहों पर हुए झगड़ों या अन्य स्थानीय विवादों से भी संबंधित हैं. युवा नेता के तौर पर उनकी पहचान जरूर है, लेकिन उनके खिलाफ दर्ज इन मामलों को लेकर समय-समय पर राजनीतिक बहस भी होती रहती है.

 2. नसीर अहमद खान (चमरौआ, रामपुर) - 30 केस

रामपुर जिले से चमरौआ सीट से विधायक नसीर अहमद खान के खिलाफ कुल 30 आपराधिक मामले दर्ज हैं. ये मामले अलग-अलग समय पर दर्ज हुए हैं, जिनमें ज्यादातर चुनावी रैलियों के दौरान हुए विवाद, सरकारी अधिकारियों से हुई झड़पें और राजनीतिक तनाव से जुड़े केस शामिल बताए जाते हैं. कई मामलों को स्थानीय राजनीति और विरोध प्रदर्शनों से भी जोड़ा जाता है. नसीर अहमद खान को इलाके की राजनीति में एक मजबूत नेता माना जाता है, लेकिन उनके विवादों और आपराधिक मामलों की वजह से वे अक्सर चर्चा में भी रहते हैं. उनका नाम अक्सर सुर्खियों में रहता है भी

3. रविदास मेहरोत्रा (लखनऊ सेंट्रल, लखनऊ) - 22 केस

लखनऊ सेंट्रल सीट से समाजवादी पार्टी के विधायक रविदास मेहरोत्रा के खिलाफ कुल 22 आपराधिक मामले दर्ज हैं. ये मामले अलग-अलग समय पर हुए राजनीतिक आंदोलनों, धरना-प्रदर्शनों और कानून-व्यवस्था से जुड़े विवादों के दौरान दर्ज किए गए बताए जाते हैं. इसके अलावा कई केस सार्वजनिक विरोध कार्यक्रमों और राजनीतिक गतिविधियों से भी जुड़े हैं. रविदास मेहरोत्रा को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में गिना जाता है और वे लंबे समय से उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय हैं, हालांकि उनके खिलाफ दर्ज इन मामलों की वजह से वे अक्सर राजनीतिक चर्चाओं में भी रहते हैं.

4. नाहिद हसन (कैराना, शामली) - 16 केस

शामली जिले की कैराना विधानसभा सीट से विधायक नाहिद हसन के खिलाफ कुल 16 आपराधिक मामले दर्ज हैं. ये मामले अलग-अलग समय पर चुनावी गतिविधियों, राजनीतिक विवादों और प्रशासनिक कार्रवाइयों के दौरान दर्ज हुए बताए जाते हैं. इसके अलावा कुछ केस कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों से भी संबंधित हैं. नाहिद हसन पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक चर्चित नाम हैं और अपने बयानों व राजनीतिक गतिविधियों की वजह से अक्सर सुर्खियों में बने रहते हैं.5

5. महेंद्र नाथ यादव (बस्ती सदर, बस्ती) - 13 केस

बस्ती सदर विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के विधायक महेंद्र नाथ यादव के खिलाफ कुल 13 आपराधिक मामले दर्ज हैं. ये मामले अलग-अलग समय पर राजनीतिक विरोध-प्रदर्शनों, धरना-प्रदर्शन और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े आरोपों के दौरान दर्ज हुए बताए जाते हैं. कुछ केस स्थानीय स्तर पर हुई राजनीतिक गतिविधियों और प्रशासनिक कार्रवाई से भी जुड़े हैं. महेंद्र नाथ यादव पूर्वांचल की राजनीति में सक्रिय नेता माने जाते हैं और उनकी पहचान एक किसान परिवार से आती है. उन्होंने साल 2022 के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल कर विधानसभा में जगह बनाई. हालांकि, उनके खिलाफ दर्ज मामलों की वजह से वे भी समय-समय पर चर्चा में बने रहते हैं.

लिस्ट में भाजपा के भी नेता शामिल

मुजफ्फरनगर सीट से भाजपा विधायक कपिल देव अग्रवाल, प्रयागराज की इलाहाबाद दक्षिण सीट से विधायक नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी', आगरा की फतेहपुर सीकरी सीट से विधायक बाबूलाल, कुशीनगर की हाटा सीट से विधायक मोहन तथा जौनपुर की मल्हनी सीट से विधायक लकी यादव के खिलाफ वर्ष 2022 के चुनावी हलफनामों के अनुसार 7-7 आपराधिक मामले दर्ज थे. इनमें राजनीतिक गतिविधियों, धरना-प्रदर्शनों, चुनावी कार्यक्रमों तथा कानून-व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुकदमे शामिल बताए गए हैं.

राजनीति में आपराधिक मामलों का बड़ा ट्रेंड

एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2022 में चुनी गई उत्तर प्रदेश विधानसभा में एक बड़ा हिस्सा ऐसे विधायकों का है जिन पर आपराधिक मामले दर्ज हैं. रिपोर्ट बताती है कि करीब 50% से ज्यादा विधायकों के खिलाफ किसी न किसी तरह के केस दर्ज हैं, जबकि लगभग 39% पर गंभीर आपराधिक मामले भी दर्ज पाए गए हैं. इसके साथ ही यह भी सामने आया है कि विधानसभा में बड़ी संख्या में विधायक करोड़पति हैं. 

आजम खान के नाम की चर्चा क्यों?

साल 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में कई बड़े नाम गंभीर आपराधिक मामलों के बावजूद जनता के वोट से विधानसभा पहुंच गए. इनमें सबसे ज्यादा चर्चा में मोहम्मद आजम खान की रही, जिन पर चुनावी हलफनामें में 87 केस दर्ज थे हालांकि वह अब विधायक नहीं हैं. बता दें सपा, भाजपा समेत कई अन्य दलों के नेताओं पर भी दर्जनों मामले दर्ज हैं, जिससे यूपी चुनाव से पहले एक बार फिर ये मुद्दा सुर्खियों में आ गया है.