Aaj Ka UP: यूपी Tak के खास शो 'आज का यूपी' में हम राज्य की तीन बड़ी खबरों का विश्लेषण करते हैं. आज के शो में पहली बड़ी खबर उत्तर प्रदेश में समय से पहले यानी 2026 में ही विधानसभा चुनाव होने और नया मुख्यमंत्री मिलने की सियासी सुगबुगाहट को लेकर है जिसने सभी दलों की धड़कनें बढ़ा दी हैं. दूसरी खबर एनडीए खेमे से आ रही है जहां ओम प्रकाश राजभर की 32 सीटों की मांग के बाद अब पश्चिमी यूपी के कद्दावर नेता जयंत चौधरी की आरएलडी ने बीजेपी से 40 सीटों पर दावा ठोककर गठबंधन में हलचल तेज कर दी है. वहीं तीसरी बड़ी खबर इंडिया गठबंधन की अंदरूनी खींचतान से जुड़ी है जहां 2027 के महामुकाबले के लिए समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस को 80 सीटों का ऑफर दिया है जबकि कांग्रेस 120 सीटों से कम पर मानने को तैयार नहीं है.
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1. यूपी में समय से पहले चुनाव की सुगबुगाहट: 2026 में ही मिल जाएगा नया मुख्यमंत्री?
उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में इन दिनों एक बेहद चौंकाने वाली चर्चा आम हो चुकी है. कयास लगाए जा रहे हैं कि उत्तर प्रदेश में अपने तय समय से पहले यानी इसी साल 2026 में ही विधानसभा चुनाव कराए जा सकते हैं. राजनीतिक विश्लेषकों के बीच यह चर्चा भी जोरों पर है कि इस साल उत्तर प्रदेश को नया मुख्यमंत्री मिल सकता है. समय से पहले चुनाव होने की इसी संभावना और सुगबुगाहट के बीच सभी राजनीतिक दलों ने जमीनी स्तर पर अपनी गोटियां सेट करना और सहयोगियों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है. यही वजह है कि सीटों के बंटवारे को लेकर दोनों ही बड़े गठबंधनों के भीतर अचानक से भारी रस्साकसी देखने को मिल रही है.
2. एनडीए में जयंत चौधरी का '40 सीटों' वाला दांव: पश्चिमी यूपी में बीजेपी की बढ़ी सिरदर्दी
इंडिया गठबंधन के बाद अब सत्ताधारी एनडीए के भीतर भी सीटों को लेकर दबाव की राजनीति शुरू हो गई है. पूर्वांचल में ओम प्रकाश राजभर द्वारा 32 सीटों पर प्रभारी घोषित करने के बाद, अब पश्चिमी यूपी में राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के मुखिया और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने बीजेपी के सामने बड़ी डिमांड रख दी है. मुरादाबाद की रैली के बाद जयंत चौधरी ने अपनी कोर कमेटी को बूथ स्तर तक की जमीनी रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं. अंदरखाने चर्चा है कि आरएलडी इस बार बीजेपी से 35 से 40 विधानसभा सीटों की मांग कर रही है. हालांकि, पिछली बार आरएलडी सपा के साथ 30 सीटों पर चुनाव लड़ी थी.
आरएलडी के राष्ट्रीय सचिव अटप मिश्रा के मुताबिक 'एग्जैक्ट नंबर तो अभी कोई नहीं कह सकता, खुद बीजेपी भी नहीं बता सकती. लेकिन हम जरूर चाहेंगे कि हम अधिक से अधिक सीटों पर लड़ें. हम उन सीटों पर भी दावा ठोकेंगे जहां पिछली बार हम बहुत कम मार्जिन से हार गए थे. हमारे लिए इस बार कुछ नए क्षेत्र भी होंगे और पुरानी परंपरागत सीटें भी होंगी.'
पश्चिमी यूपी का समीकरण और बीजेपी की सोच
पश्चिमी यूपी में बीजेपी पारंपरिक रूप से हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण की बैसाखी पर चुनाव जीतती आई है. अखिलेश यादव इस ध्रुवीकरण को तोड़ने के लिए जाट-गुर्जर-सैनी और मुस्लिम (PDA) समीकरण बना रहे हैं. जबकि एनडीए में जाट वोटों को सहेजने का जिम्मा जयंत चौधरी के पास है. हालांकि पिछली बार जयंत चौधरी बीजेपी के खिलाफ लड़कर भी महज 40% जाट वोट ही तोड़ पाए थे और 60% जाट बीजेपी के साथ ही रहा. सूत्रों की मानें तो जयंत चौधरी बीजेपी से पारंपरिक सीटों के अलावा सपा के गढ़ वाली सीटों (जैसे मुरादाबाद की काठ सीट) की भी मांग कर रहे हैं जहां बीजेपी को टिकट देने में कोई गुरेज नहीं होगा. लेकिन मथुरा और आगरा की कुछ सीटों पर जहां बीजेपी के मौजूदा मंत्री हैं वहां पेंच फंसना तय है.
3. इंडिया गठबंधन में 'बड़े दिल' की परीक्षा: सपा का 80 सीटों का ऑफर, कांग्रेस अड़ी 120 पर
दिल्ली में राहुल गांधी और अखिलेश यादव की मुलाकात और हाथ मिलाते हुए तस्वीरों के बीच सीट शेयरिंग को लेकर असली बारगेनिंग अब शुरू हो चुकी है. सूत्रों के हवाले से बड़ी खबर आ रही है कि समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस को उत्तर प्रदेश की कुल सीटों में से 80 सीटें देने का मन बनाया है, यानी मोटे तौर पर हर जिले में एक सीट. दूसरी तरफ, कांग्रेस ने अपना आखिरी न्यूनतम आंकड़ा 120 सीटों का तय किया है.
सपा नेताओं ने दी नसीहत
सीटों के इस फासले के बीच समाजवादी पार्टी के नेताओं ने पोस्चरिंग (पोजिशनिंग) शुरू कर दी है. शिवपाल सिंह यादव के बेटे आदित्य यादव और अखिलेश के बेहद करीबी उदयवीर सिंह के बयानों से सपा की नीति साफ झलक रही है. आदित्य यादव ने कहा कि 'हमें बड़े लक्ष्य को देखकर चलना होगा. हर दल को अपना दिल और मन बड़ा करना होगा, एक-दूसरे को सम्मानित स्पेस देना होगा ताकि सबकी भागीदारी सुनिश्चित हो सके.'
उदयवीर सिंह ने साफ नीति बताते हुए कहा 'हम लोगों ने इंडिया अलायंस में यही स्टैंड रखा है कि जो दल जिस प्रदेश में मजबूत है, उसे वहां मजबूत करिए. कांग्रेस एक नेशनल पार्टी है और राष्ट्रीय विकल्प के तौर पर हम हमेशा उन्हें महत्व देते रहे हैं और आगे भी देंगे.'
कहां फंसेगा पेंच?
समाजवादी पार्टी उन सीटों को कांग्रेस को किसी भी कीमत पर नहीं देगी जहां सपा या तो मौजूदा विधायक है या फिर 2022 में दूसरे नंबर पर रही थी. सपा केवल वही सीटें कांग्रेस के पाले में डालना चाहती है जहां सपा तीसरे नंबर पर थी या फिर जिन क्षेत्रों में (जैसे प्रतापगढ़ और सहारनपुर) कांग्रेस का प्रदर्शन ऐतिहासिक रूप से बेहतर रहा है. हालांकि अंतिम मोहर लगने से पहले अभी कई दौर की बैठकें और सूचियों का आदान-प्रदान होना बाकी है.
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