बदायूं की वो सीट जहां दो परिवारों के इर्द-गिर्द घूमती है सियासत, जानें क्या हैं शेखूपुर के चुनावी समीकरण

UP Kiska: बदायूं की शेखूपुर विधानसभा सीट पर 2027 चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है. यादव और शाक्य परिवारों की पुरानी प्रतिद्वंद्विता, मुस्लिम वोट बैंक की भूमिका और नए दावेदारों की एंट्री ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है.

Shekhupur Assembly Election 2027

Shekhupur Assembly Election 2027

रजत सिंह

09 Jun 2026 (अपडेटेड: 09 Jun 2026, 02:27 PM)

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Shekhupur Assembly Election 2027: उत्तर प्रदेश की सियासत में कई ऐसी विधानसभा सीटें हैं जहां किसी राजनीतिक दल से ज्यादा कुछ खास परिवारों का रसूख चलता है. 'यूपी किसका' में आज बात बदायूं जिले की हाई-प्रोफाइल शेखूपुर विधानसभा सीट की. शेखूपुर एक ऐसी अनूठी सीट है जहां पिछले कई दशकों से सिर्फ दो ही परिवारों का दबदबा रहा है. एक परिवार है समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे बनवारी सिंह यादव का और दूसरा परिवार है भगवान सिंह शाक्य का. इस सीट का इतिहास गवाह है कि यहां की जनता कभी इस परिवार को चुनती है तो कभी उस परिवार को. आइए जानते हैं कि आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर इन दोनों परिवारों के बीच क्या तैयारी है और इस सीट का सियासी व जातीय गणित क्या कहता है.

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सपा के जनक बनवारी सिंह बनाम शाक्य परिवार की विरासत

शेखूपुर विधानसभा सीट (जो परिसीमन से पहले भी इन्हीं चेहरों के इर्द-गिर्द थी) पर बनवारी सिंह यादव का परिवार समाजवादी पार्टी का गढ़ संभालता आया है. बनवारी सिंह यादव के बाद उनके बेटे आशीष यादव ने यहां से चुनाव जीता और वर्तमान में उनके पौत्र (पोते) हिमांशु यादव यहां से सपा के विधायक हैं. दूसरी तरफ भगवान सिंह शाक्य का परिवार विभिन्न दलों से होते हुए अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ मजबूती से खड़ा है. साल 2017 में इस सीट से भगवान सिंह शाक्य के बेटे धर्मेंद्र सिंह शाक्य ने बीजेपी के टिकट पर जीत दर्ज की थी. लेकिन 2022 में बाजी वापस बनवारी सिंह के पोते हिमांशु यादव के हाथ लग गई.

मौजूदा विधायक हिमांशु यादव ने सरकार पर साधा निशाना

2027 की तैयारियों के बीच मौजूदा सपा विधायक हिमांशु यादव ने क्षेत्र के विकास को लेकर बीजेपी सरकार की घेराबंदी की है. हिमांशु यादव ने कहा 'मैं जब से चुनाव जीता हूं तभी से लगातार जनता के बीच तैयारियों में जुटा हूं. सरकार विकास की बातें करती है. लेकिन हमें मिलने वाली विधायक निधि में से भी 18% काट कर दिया गया. जो फंड मिला, उससे हमने सड़क और लाइट का काम कराया. लेकिन क्षेत्र में 'हर घर नल योजना' के तहत जो लाइनें बिछाई गईं उनकी वजह से सड़कें पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं. टंकियां बार-बार गिर रही हैं और हम जब भी सड़क बनवाते हैं, पाइपलाइन के नाम पर उसे तोड़ दिया जाता है.'

पूर्व विधायक धर्मेंद्र शाक्य का पलटवार 

सपा विधायक के दावों के उलट बीजेपी के पूर्व विधायक धर्मेंद्र सिंह शाक्य ने 2027 में अपनी जीत का दावा ठोक दिया है. उन्होंने कहा 'मेरी तैयारी चुनाव देखकर नहीं होती, बल्कि पिछला चुनाव खत्म होते ही मैं अगले चुनाव में जुट जाता हूं. 2017 में मुझे 93 हजार वोट मिले थे और 2022 में हारने के बावजूद मुझे 1 लाख से ज्यादा वोट मिले. जो लोग यहां जाति-धर्म की राजनीति कर रहे हैं, उन्हें क्षेत्र की जनता 2027 के चुनाव में मुंहतोड़ जवाब देगी और बाजी हमारे हाथ ही आएगी.'

क्या मुस्लिम कार्ड खेलेगी सपा?  

स्थानीय पत्रकारों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शेखूपुर भले ही बनवारी सिंह यादव की पैतृक सीट रही हो. लेकिन यहां सबसे बड़ी आबादी मुस्लिम मतदाताओं की है. पत्रकारों का दावा है कि अगर समाजवादी पार्टी 2027 के चुनाव में किसी यादव के बजाय 'मुस्लिम चेहरे' पर दांव लगाती है, तो उसे एकतरफा फायदा मिल सकता है और जीत की राह आसान हो सकती है.

फिलहाल चुनाव में कुछ समय शेष है, लेकिन इस सीट पर नए दावेदारों ने एंट्री मार दी है. बदायूं सदर से पूर्व विधायक और चेयरमैन रहे आबिद रजा खान पिछले कुछ महीनों से शेखूपुर में काफी सक्रिय हैं और सघन जनसंपर्क कर रहे हैं. वहीं बीजेपी खेमे से पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम यादव का नाम भी चर्चा में है. अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या 2027 में भी रोटेशन के हिसाब से 'एक बार यादव, एक बार शाक्य' का पुराना सिलसिला जारी रहता है या फिर अखिलेश यादव का 'पीडीए (PDA) दांव' यहां कोई नया इतिहास लिखता है.