Aaj ka UP: यूपी Tak के खास शो 'आज का यूपी' हाजिर है. इस शो में हम उत्तर प्रदेश की राजनीति और व्यवस्था से जुड़ी राज्य की तीन बड़ी खबरों का विस्तृत विश्लेषण करते हैं. आज के इस अंक की तीन बड़ी खबरों के सार की बात करें तो पहली बड़ी खबर समाजवादी पार्टी के भीतर सांसदों की संभावित टूट की भविष्यवाणियों और बयानों से जुड़ी है, जिसने यूपी की सियासत में भूचाल ला दिया है. दूसरी बड़ी खबर सपा के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव और देश के गृह मंत्री अमित शाह की एक रहस्यमयी मुलाकात और सोशल मीडिया पर वायरल हो रही 'पर्ची' के सच से जुड़ी है. वहीं हमारी तीसरी बड़ी खबर में इस बात का विश्लेषण है कि आखिर सपा के वो कौन से सांसद हैं जो बीजेपी के रडार पर हैं और पूर्वांचल के किस बड़े चेहरे को लेकर राजनीतिक गलियारों में अटकलें सबसे तेज हैं.
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1. सपा में बड़ी टूट का दावा: सच या बीजेपी का सियासी 'माइंड गेम'?
उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों एक ही सवाल सबसे बड़ा बना हुआ है. क्या सचमुच समाजवादी पार्टी के भीतर टूट के हालात हैं? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के नेता लगातार दावा कर रहे हैं कि सपा के सांसद कभी भी पाला बदल सकते हैं.
इस सियासी बयानों की झड़ी की शुरुआत सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर के एक ट्वीट से हुई, जिसमें उन्होंने सपा के 30 सांसदों के टूटने की बात कही. इसके तुरंत बाद उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी 25 से 26 सांसदों के पाला बदलने का दावा कर दिया. रही-सही कसर निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद ने पूरी कर दी जिन्होंने दावा किया कि कई सपा सांसद उनके सीधे संपर्क में हैं और वह इस सिलसिले में दिल्ली जाकर बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व से बात करेंगे.
क्या है इसके पीछे की टाइमिंग?
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, इस समय देश में विपक्षी पार्टियों के बिखरने का मौसम चल रहा है जहां टीएमसी और शिवसेना (उद्धव गुट) में टूट की खबरें गर्म हैं. ऐसे में बीजेपी और उसके सहयोगी दल यूपी में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं का मनोबल तोड़ना चाहते हैं. हालांकि केशव प्रसाद मौर्य के ही एक बयान से साफ होता है कि यह फिलहाल एक 'माइंड गेम' है क्योंकि मौर्य ने कहा है कि 2027 का चुनाव हारने के बाद सपा का हश्र टीएमसी से भी बुरा होगा जिससे यह संकेत मिलता है कि फिलहाल सांसदों की संख्या बल को कोई तुरंत खतरा नहीं है.
सपा का पलटवार: 'अयोध्या मामले से ध्यान भटकाने का खेल'
दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी इसे बीजेपी का डायवर्जन गेम मान रही है. सपा का कहना है कि अयोध्या में चढ़ावे और चंदे में हुई कथित चोरी के मामले को अखिलेश यादव ने प्रमुखता से उठाया है जिससे बीजेपी बुरी तरह बैकफुट पर आ गई है. इसी मुद्दे को दबाने और आई-वॉश करने के लिए सपा में टूट की अफवाहें फैलाई जा रही हैं.
2. रामगोपाल यादव और अमित शाह की मुलाकात: वायरल पर्ची के पीछे की इनसाइड स्टोरी
इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गया है जिसने अफवाहों के बाजार को और गर्म कर दिया है. इस वीडियो में समाजवादी पार्टी में नंबर दो की हैसियत रखने वाले प्रोफेसर रामगोपाल यादव देश के गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करते नजर आ रहे हैं.
मुलाकात और राजभर का दावा
वीडियो में दिख रहा है कि रामगोपाल यादव बेहद मुस्कुराते हुए अमित शाह को एक पर्ची (चिट्ठी) थमा रहे हैं और अमित शाह भी हंसते हुए उसे स्वीकार कर हाथ जोड़ रहे हैं. इस मुलाकात को लेकर ओम प्रकाश राजभर ने एक बड़ा दावा कर दिया है. राजभर के मुताबिक 'रामगोपाल यादव ने गृह मंत्री को जो चिट्ठी सौंपी है, उसमें सीबीआई द्वारा अवैध खनन मामले में अखिलेश यादव और गोमती रिवर फ्रंट मामले में शिवपाल यादव व उनके परिवार के लोगों का नाम हटाकर उन्हें बचाने की गुहार लगाई गई है.
राजभर का आरोप है कि इस 'जान बचाने' की एवज में सपा के कई सांसदों को बीजेपी के साथ भेजने की डील की जा रही है और इसे खुद रामगोपाल यादव लीड कर रहे हैं.
हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस वीडियो और पर्ची को ढाल बनाकर बीजेपी विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' के भीतर अविश्वास का माहौल पैदा करना चाहती है ताकि जमीनी स्तर पर सपा की एकजुटता पर सवाल खड़े किए जा सकें.
3. बीजेपी के रडार पर कौन? पूर्वांचल के 'उस' सांसद की कहानी जिसने बढ़ाई हलचल
अगर बयानों और अफवाहों से हटकर जमीनी हकीकत को देखा जाए, तो समाजवादी पार्टी के 25-26 सांसदों को एक साथ तोड़ लेना किसी भी दल के लिए बेहद मुश्किल और लगभग असंभव कार्य है. लेकिन फिर भी यह चर्चा इतनी हवा कैसे पकड़ रही है?
बाहरी बैकग्राउंड वाले नेताओं पर नजर
सपा के भीतर पिछले कुछ हफ्तों से यह अंदरूनी चर्चा चल रही है कि पार्टी के कुछ ऐसे सांसद जो मूल रूप से समाजवादी विचारधारा या संगठन (कार्डर) से नहीं जुड़े हैं, वे कमजोर कड़ी साबित हो सकते हैं. इनमें खास तौर पर ऐसे नेता शामिल हैं जो बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के बैकग्राउंड से आए हैं या चुनाव से ठीक पहले बाहर से आकर सपा के टिकट पर चुनाव जीते हैं.
पूर्वांचल के एक सांसद पर टिकी नजरें
इस पूरी थ्योरी के केंद्र में पूर्वांचल से जीतकर आए एक विशिष्ट सपा सांसद का नाम सबसे आगे चल रहा है. सियासी फिजाओं में तैर रही खबरों के अनुसार इन सांसद महोदय पर पहले से ही भ्रष्टाचार के कई गंभीर आरोप और जांच चल रही हैं. अतीत में यह नेता भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का हिस्सा भी रह चुके हैं.
माना जा रहा है कि ऐसे ही कुछ नेता हैं जिनका समाजवादी पार्टी से कोई पुराना या भावनात्मक लगाव नहीं है और वे किसी भी कानूनी या राजनीतिक संकट की स्थिति में पाला बदल सकते हैं. बीजेपी रणनीतिक रूप से इन्हीं चेहरों को अपने रडार पर ले रही है ताकि जरूरत पड़ने पर सपा के भीतर एक बड़ी सेंधमारी की जा सके.फिलहाल इस पूरे माइंड गेम में अगर सपा का कैडर फंसता है तो 2027 की राह बीजेपी के लिए आसान हो जाएगी.
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