Akhilesh Yadav VS Dhananjay Singh: जौनपुर के बाहुबली पूर्व सांसद धनंजय सिंह इन दिनों सातवें आसमान पर हैं. महाराष्ट्र के बीएमसी और नगर पालिका चुनावों में धनंजय सिंह ने जिन चार प्रत्याशियों के लिए पसीना बहाया था उन चारों ने जीत दर्ज कर बाहुबली के इम्पैक्ट को साबित कर दिया है. लेकिन इस जीत से ज्यादा चर्चा धनंजय सिंह की उस गाड़ी की हो रही है जिसका नंबर सीधे समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव की गाड़ी से मेल खाता है. क्या यह महज एक इत्तेफाक है या धनंजय सिंह की ओर से अखिलेश यादव को दिया गया कोई सांकेतिक जवाब? पूर्वांचल की इस सियासी जंग ने अब महाराष्ट्र तक हलचल मचा दी है.
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चार सीटों के लिए धनंजय सिंह ने किया था प्रचार
धनंजय सिंह बीएमसी चुनाव में बीजेपी और शिवसेना (शिंदे गुट)के गठबंधन महायुति के लिए प्रचार करने वसई-विरार इलाके में पहुंचे थे. उन्होंने वार्ड नंबर 18 समेत चार सीटों पर प्रचार किया और दिलचस्प बात यह है कि चारों उम्मीदवार चुनाव जीत गए. दूसरी ओर महाराष्ट्र में समाजवादी पार्टी के लिए नतीजे निराशाजनक रहे. पार्टी का खाता केवल वार्ड नंबर 201 से इरम सिद्दीकी की जीत के साथ खुला.जबकि AIMIM चार सीटें जीतने में कामयाब रही. इस हार पर सपा नेता अबू आजमी ने चुनाव में धांधली के आरोप लगाए हैं.
अखिलेश यादव vs धनंजय सिंह
सोशल मीडिया पर धनंजय सिंह का एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें वह 0999 नंबर की गाड़ी में सवार नजर आ रहे हैं. गौर करने वाली बात यह है कि अखिलेश यादव की पसंदीदा गाड़ी का नंबर भी 0999 ही है. बता दें कि अखिलेश यादव ने हाल ही में धनंजय सिंह के काफिले की गाड़ियों के नंबर को लेकर सवाल उठाए थे. उस वक्त धनंजय ने सफाई दी थी कि उन्होंने तिरुपति बालाजी ट्रस्ट की गाड़ियों से प्रेरित होकर 97 नंबर लिया था. अब मुंबई में 099 नंबर की गाड़ी में बैठकर धनंजय ने एक नई चर्चा छेड़ दी है. राजनीति के जानकार इसे अखिलेश यादव को चिढ़ाने या बराबरी का संदेश देने के प्रयोग के तौर पर देख रहे हैं.
दोनों नेताओं के बीच ठनने की मुख्य वजह कोडिन युक्त कफ सिरप की तस्करी का मामला है. धनंजय सिंह के करीबी माने जानें वाले आलोक सिंह और अमित सिंह टाटा की गिरफ्तारी के बाद अखिलेश यादव ने बिना नाम लिए धनंजय को कोडिन भैया कहा था. इसके जवाब में धनंजय ने अखिलेश यादव को क्षत्रिय विरोधी करार दिया. धनंजय ने साफ किया कि वह अपने करीबियों को जानते हैं. लेकिन उनके गलत कामों में उनकी कोई संलिप्तता नहीं है.
संगीत सोम और बीफ फैक्ट्री का पुराना विवाद
इस सियासी खींचतान के बीच पुराने विवाद भी उभर रहे हैं. अखिलेश यादव के समर्थकों द्वारा धनंजय सिंह और संगीत सोम जैसे नेताओं पर बीफ कंपनियों जैसे अलदुआ से जुड़े होने के आरोप लगाए जाते रहे हैं. हालांकि संगीत सोम ने पहले ही साफ कर दिया था कि उन्होंने 20 साल पहले सिर्फ एक जमीन खरीदी और बेची थी उस कंपनी से उनका कोई सक्रिय जुड़ाव नहीं था. धनंजय सिंह ने भी इन आरोपों को सपा का दुष्प्रचार बताया है.
2027 की राह और धनंजय की रणनीति
बीएमसी चुनाव में जीत का स्वाद चखने के बाद अब सवाल यह है कि क्या धनंजय सिंह 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में बीजेपी गठबंधन का हिस्सा होंगे? जिस तरह से उन्होंने महाराष्ट्र में बीजेपी के लिए जमीन तैयार की है उससे संकेत साफ हैं. अब देखना यह होगा कि जौनपुर के मैदान में जब दोबारा आमना-सामना होगा तो अखिलेश यादव इस बाहुबली चुनौती को कैसे ध्वस्त करेंगे.
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