संभल SP केके बिश्नोई के रिसेप्शन में शामिल हुए थे सपा के ये 3 विधायक, क्या अब इनका कट जाएगा टिकट? अखिलेश हुए थे नाराज

Aaj Ka UP: यूपी तक के शो 'आज का यूपी' में देखें अखिलेश यादव की अपने विधायकों से नाराजगी. ओम प्रकाश राजभर का खुद को 'बेहया' बताने वाला बयान और अतीक अहमद के खौफ की वो कहानी जब रेलवे को भागना पड़ा था.

Sambhal SP Reception

रजत सिंह

04 Apr 2026 (अपडेटेड: 04 Apr 2026, 01:09 PM)

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Aaj Ka UP: यूपी तक का खास शो 'आज का यूपी' राज्य की राजनीतिक और सामाजिक हलचलों का सबसे सटीक विश्लेषण पेश करता है. आज के अंक में हम उत्तर प्रदेश की तीन बड़ी खबरों पर विस्तार से चर्चा करेंगे. पहली खबर में हम जानेंगे कि आखिर संभल के एक चर्चित पुलिस अधिकारी की शादी में शामिल होना सपा के तीन विधायकों को क्यों भारी पड़ रहा है और क्या अखिलेश यादव उनका टिकट काट देंगे? दूसरी खबर में पूर्वांचल के कद्दावर नेता ओम प्रकाश राजभर के उस बयान का विश्लेषण करेंगे जिसमें उन्होंने खुद को 'बेहया' बताते हुए मुख्यमंत्री और अधिकारियों से लड़ने की हुंकार भरी है. वहीं तीसरी खबर में अतीक अहमद के माफिया राज के उस दौर की पड़ताल करेंगे जब उसके खौफ से रेलवे को अपना पूरा गोदाम ही प्रयागराज से झांसी शिफ्ट करना पड़ा था.

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1. संभल एसपी की शादी और अखिलेश की नाराजगी: क्या कटेगा तीन विधायकों का टिकट?

समाजवादी पार्टी के भीतर इन दिनों संभल के तीन विधायक इकबाल महमूद, राम खिलाड़ी यादव और पिंकी यादव को लेकर काफी चर्चा है. मामला संभल के एसपी कुलदीप सिंह बिश्नोई की शादी से जुड़ा है. दरअसल, संभल हिंसा और उसके बाद की पुलिसिया कार्रवाई को लेकर अखिलेश यादव ने सख्त रुख अपनाया था. ऐसे में जब पार्टी के ही तीन विधायक एसपी के रिसेप्शन में शामिल हुए तो अखिलेश यादव ने इसे अनुशासनहीनता माना.

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव की नाराजगी साफ दिखी.उन्होंने कहा कि स्पष्ट निर्देश होने के बावजूद विधायकों का वहां जाना गलत था और उन्हें 'नसीहत' दी जाएगी. अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह नसीहत 2027 के चुनाव में टिकट कटने तक पहुंचेगी? विशेषकर इकबाल महमूद के लिए राह मुश्किल हो सकती है. क्योंकि जिले में 'बर्क बनाम नवाब' की पुरानी सियासी जंग एक बार फिर तेज हो गई है. हालांकि जानकारों का मानना है कि इकबाल महमूद की समावेशी राजनीति और उनके पास मौजूद हिंदू-मुस्लिम वोटों के संतुलन के कारण उनका टिकट काटना पार्टी के लिए इतना आसान नहीं होगा.

2. "मैं तो बेहया हूं...": ओम प्रकाश राजभर का बेबाक अंदाज और सीएम पर टिप्पणी

अपनी बेबाक बयानबाजी के लिए मशहूर सुभासपा अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर एक बार फिर अपने बयानों के कारण सुर्खियों में है. एक सार्वजनिक मंच से राजभर ने खुद को 'बेहया' बताते हुए कहा कि वह गरीबों के काम कराने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं.

राजभर ने हुंकार भरते हुए कहा कि चाहे डीएम हो, डीजीपी हो या खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, अगर किसी गरीब के साथ अन्याय होगा तो वह लड़ने से पीछे नहीं हटेंगे. उन्होंने संविधान की कसम खाते हुए कहा कि वह जनता के काम कराने के लिए जिद्दी हैं और इसी स्वभाव के कारण लोग उन्हें अलग-अलग नामों से पुकारते हैं. राजनीतिक गलियारों में इस बयान के कई मायने निकाले जा रहे हैं.क्या यह केवल जनता को रिझाने का एक तरीका है या सरकार के भीतर किसी खींचतान का संकेत, यह आने वाला वक्त ही बताएगा.

3. अतीक अहमद का माफिया तंत्र: जब रेलवे को भी मांगनी पड़ी थी पनाह

उत्तर प्रदेश के माफिया इतिहास में अतीक अहमद का नाम खौफ का पर्याय रहा है.आज के शो में हम अतीक के उस दौर की बात कर रहे हैं जब उसकी गुंडागर्दी से केवल आम जनता ही नहीं बल्कि सरकारी विभाग भी कांपते थे. एक समय था जब प्रयागराज (तब इलाहाबाद) में रेलवे स्क्रैप का बड़ा काम होता था और अतीक का गैंग इस पर पूरी तरह हावी था.

अतीक के माफियाज्म और रेलवे गोदामों में बढ़ती दखलअंदाजी से परेशान होकर रेलवे प्रशासन को मजबूरन अपना सारा काम और गोदाम झांसी शिफ्ट करना पड़ा था. यह अतीक के डर की पराकाष्ठा थी। जब रेलवे स्क्रैप का धंधा मंदा पड़ा तो अतीक ने अपनी नजरें जमीनों पर गड़ाईं. यहीं से 'लस्ट ऑफ लैंड' यानी जमीन के लालच की कहानी शुरू हुई जिसने प्रयागराज के गंगा कछार से लेकर सिविल लाइंस तक की कीमती जमीनों को कौड़ियों के दाम कब्जाने का खूनी खेल शुरू किया.