संभल एसपी केके बिश्नोई और बरेली की एसपी साउथ अंशिका वर्मा के रिसेप्शन में समाजवादी पार्टी के तीन विधायकों की शिरकत ने पार्टी हाईकमान को नाराज कर दिया है. खुद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि उनके विधायकों को रिसेप्शन में नहीं जाना चाहिए था और वह बातचीत कर उन्हें समझाएंगे. अखिलेश यादव के बयान के बाद रिसेप्शन में शामिल होने वालीं सपा विधायक पिंकी यादव का रिएक्शन सामने आया है.
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मालूम हो कि 30 मार्च को राजस्थान के जोधपुर में हुए इस हाई-प्रोफाइल रिसेप्शन में संभल से सपा के तीन विधायक पिंकी यादव, इकबाल महमूद और राम खिलाड़ी यादव पहुंचे थे. मंच पर मुस्कुराते हुए फोटो खिंचवाना और शुभकामनाएं देना अब इन विधायकों के लिए भारी पड़ता दिख रहा है. 2 अप्रैल को प्रेस कॉन्फ्रेंसे के दौरान अखिलेश यादव ने दोटूक कहा, "उन्हें शामिल नहीं होना चाहिए था. हम लोग आपस में बातचीत करके उन्हें समझाएंगे."
'प्लान नहीं था, जोधपुर में थी इसलिए गई'
पार्टी प्रमुख की नाराजगी के बाद असमोली विधायक पिंकी यादव ने सफाई पेश की है. उन्होंने यूपी Tak से बातचीत में कहा कि वे विशेष रूप से रिसेप्शन के लिए राजस्थान नहीं गई थीं, बल्कि अपने परिवार के साथ पहले से ही जोधपुर ट्रिप पर थीं. उन्होंने स्पष्ट किया, "व्यावहारिक तौर पर जाना ठीक समझा, इसलिए गए थे. हम पार्टी के सिपाही हैं और राष्ट्रीय अध्यक्ष के हर आदेश का पालन किया जाएगा." फोटो डिलीट करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि उन्होंने कोई पोस्ट किया ही नहीं था तो डिलीट करने का सवाल ही नहीं उठता.
विधायकों की इस शिरकत पर समाजवादी पार्टी के मीडिया सेल ने सोशल मीडिया (X) पर बेहद तीखा हमला बोला है. पोस्ट में संभल के एसपी को विवादित और भाजपाई माइंडसेट वाला अधिकारी करार दिया गया. सपा मीडिया सेल ने लिखा कि जो अधिकारी भाजपा के इशारे पर समाजवादियों पर अत्याचार करते हैं, वे सियासी हवा भांपकर मेलजोल बढ़ा रहे हैं. पार्टी ने कार्यकर्ताओं को ऐसे 'समाज विरोधी तत्वों' से 'भरपूर दूरी' बनाने की नसीहत दी है.
सपा की इस नाराजगी के पीछे संभल का वह तनावपूर्ण माहौल है, यहां हाल के दिनों में सांसद जियाउर्रहमान बर्क के खिलाफ एफआईआर, बुलडोजर एक्शन और नोटिस की कार्रवाइयां हुई हैं. सपा अक्सर इन कार्रवाइयों को लेकर पुलिस प्रशासन को कठघरे में खड़ा करती रही है. ऐसे में जिस प्रशासन के खिलाफ सपा सड़कों पर लड़ रही है. उसी के मुखिया के निजी जश्न में विधायकों का शामिल होना अखिलेश यादव को नागवार गुजरा है.
समझाने के पीछे क्या है सियासी संदेश?
अखिलेश यादव का यह कहना कि वे समझाएंगे, सियासी गलियारों में बड़े संकेत दे रहा है. सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह सिर्फ मौखिक चेतावनी होगी या विधायकों से लिखित जवाब मांगा जाएगा? संभल में पार्टी नेताओं पर हो रहे एक्शन के बीच विधायकों का यह दोस्ताना व्यवहार कार्यकर्ताओं के मनोबल को प्रभावित कर सकता है, जिसे रोकने के लिए अखिलेश ने सख्त तेवर अपनाए हैं.
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